
धनबाद : झारखंड के धनबाद जिला में झरिया कोयलांचल में भूमिगत आग और भू-धंसान का खतरा एक बार फिर सामने आया है। रविवार को बीसीसीएल के लोदना क्षेत्र संख्या 10 के अंतर्गत लिलोरी पथरा बालूगद्दा में अचानक तेज धमाके के साथ जमीन धंसने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही क्षणों में जमीन के भीतर विशाल गोफ बन गया और इसकी चपेट में स्थानीयों के अनुसार सुमित कुमार के घर का अगला हिस्सा आ गया। घटना के बाद आसपास रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई।
झरिया भू-धंसान में घर का हिस्सा जमीन में समाया
स्थानीयों के अनुसार, सुमित कुमार के घर के मुख्य दरवाजे के पास अचानक जमीन में कंपन हुआ और तेज धमाके जैसी आवाज सुनाई दी। इसके बाद जमीन का बड़ा हिस्सा धंस गया और देखते ही देखते वहां गहरा गोफ बन गया। घर का अगला भाग भी इसकी चपेट में आ गया। घटना इतनी अचानक हुई कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
भू-धंसान के बाद आसपास के कई मकानों की दीवारों में भी गहरी दरारें दिखाई देने लगीं। स्थानीय लोगों को आशंका है कि जमीन के नीचे चल रही गतिविधियों के कारण आसपास के दूसरे मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है। घटना के बाद ग्रामीण अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाते नजर आए।
बाल-बाल बचा परिवार, धमाके के समय घर से बाहर थे सुमित
भू-धंसान की घटना में सुमित कुमार और उनके परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए। सुमित ने बताया कि घटना के समय आसपास किसी बात को लेकर विवाद हो रहा था। शोर सुनकर वह घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान उनके घर के दरवाजे के पास तेज आवाज हुई और जमीन अचानक धंस गई।
यदि वह उस समय घर के भीतर होते तो बड़ा हादसा हो सकता था। जमीन धंसने के बाद परिवार और आसपास के लोगों में भय का माहौल बन गया। लोगों ने तत्काल अपने जरूरी सामान को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना शुरू कर दिया।
गोफ से गैस रिसाव, भूमिगत आग को लेकर ग्रामीण चिंतित
विशाल गोफ बनने के बाद वहां से लगातार गैस का रिसाव होने की बात सामने आई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इलाके के नीचे लंबे समय से भूमिगत आग की समस्या बनी हुई है। इसी वजह से जमीन धंसने और गैस निकलने की घटनाओं को लेकर ग्रामीणों में लगातार चिंता बनी रहती है।
ग्रामीणों के मुताबिक, गैस रिसाव और मकानों में बढ़ती दरारों के बीच किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। उनका कहना है कि भू-धंसान प्रभावित क्षेत्र में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है।
182 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में तेजी की मांग
घटना से नाराज ग्रामीणों ने बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी की। लोगों ने प्रबंधन पर प्रभावित परिवारों की सुरक्षा और पुनर्वास के मामले में गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना है कि कतरास के सोनारडीह और छाताबाद में भू-धंसान की घटनाएं सामने आने के बावजूद झरिया के प्रभावित इलाकों में स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र का सर्वे पूरा किया जा चुका है और जोखिम वाले परिवारों की पहचान भी की गई है। इसके बावजूद पुनर्वास की प्रक्रिया में देरी हो रही है। ग्रामीणों का दावा है कि 182 प्रभावित परिवारों की सूची तैयार होने के बाद भी उन्हें बेलगाड़िया टाउनशिप में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

