
Jamshedpur : जमशेदपुर के युवा कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड की जांच में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने इस मामले में उत्तर प्रदेश से दोनों शूटरों को गिरफ्तार कर लिया है। यह दोनों शूटर वही हैं, जो सीसीटीवी फुटेज में दिखे थे। इसके साथ ही हत्या में मास्टरमाइंड की भूमिका निभाने के आरोप में मानगो निवासी अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है।
बताया जा रहा है कि निखार सबलोक की हत्या के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज में दोनों शूटरों की तस्वीरें कैद हुई थीं। इसके बाद से पुलिस उनकी तलाश में जुटी थी। इससे पहले पुलिस ने शूटरों के ड्राइवर को बिहार से गिरफ्तार किया था। ड्राइवर की गिरफ्तारी के बाद शूटरों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने लगातार छापेमारी और तकनीकी जांच की।

जांच में पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि निखार सबलोक की हत्या के लिए दोनों शूटरों को कथित तौर पर सुपारी दी गई थी। सूत्रों के अनुसार, दोनों शूटर झारखंड में पहले भी एक बड़े हत्याकांड को अंजाम दे चुके हैं। इसी दौरान दुमका जेल में उनकी मुलाकात गैंगस्टर अखिलेश सिंह से हुई थी। इसके बाद कथित तौर पर निखार की हत्या के लिए उनका इस्तेमाल किया गया।
जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में हत्याकांड से जुड़े आरोपियों तक पहुंचने में सफलता मिली है। घटना के करीब छह दिनों के भीतर पुलिस ने मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियों को जोड़ लिया है। पुलिस का दावा है कि हत्याकांड से जुड़े अधिकांश अहम आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपियों को जमशेदपुर लाया जा रहा है।
जमीन विवाद और शिकायत की पृष्ठभूमि में हत्या की साजिश
पुलिस जांच में अब तक सामने आया है कि निखार सबलोक की हत्या का मामला केवल सामान्य जमीन विवाद तक सीमित नहीं था। जमीन से जुड़े विवाद और उससे संबंधित शिकायत की पृष्ठभूमि में हत्या की साजिश रचे जाने की बात सामने आई है। पुलिस ने हत्या की साजिश, सुपारी देने वालों, शूटरों की भूमिका और वारदात के पीछे की वास्तविक वजह को लेकर जांच की है।
पुलिस जल्द ही पूरे मामले का विस्तृत खुलासा कर सकती है। इसमें हत्या की साजिश कैसे रची गई, किसने सुपारी दी, शूटरों को कैसे जमशेदपुर लाया गया और वारदात के बाद उन्हें भागने में किसने मदद की, इसकी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
अशोक सिंह राघव का इलाज जारी, तीन लोग पीआर बांड पर रिहा
मामले में साजिशकर्ता के तौर पर हिरासत में लिए गए सोनारी निवासी अशोक सिंह राघव का इलाज अभी भी टाटा मुख्य अस्पताल में चल रहा है। वहीं, अशोक सिंह राघव के साथ गाड़ी में पकड़े गए तीन अन्य लोगों को पुलिस ने पीआर बांड पर छोड़ दिया है। जांच में इन तीनों की निखार सबलोक हत्याकांड में संलिप्तता नहीं पाई गई।

