- जल संचय नहीं किया तो आने वाले समय में पानी बड़ी चुनौती बनेगा, जैविक खेती को बढ़ावा देने पर दिया जोर
रांची : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि आज खेती-बाड़ी सिर्फ पारंपरिक पेशा नहीं रह गया है, बल्कि यह रोजगार और उद्यम का बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। बड़ी संख्या में लोग कॉरपोरेट क्षेत्र की नौकरियां छोड़कर खेती और उससे जुड़े व्यवसायों की ओर लौट रहे हैं। ऐसे में नई-नई तकनीकों का उपयोग और आधुनिक खेती को अपनाना समय की जरूरत है।
मंगलवार को मोरहाबादी मैदान में तीन दिवसीय झारखंड कृषि व्यापार मेला-2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि का दायरा इतना बड़ा है कि यदि कोई व्यक्ति किसी एक क्षेत्र को भी गंभीरता से अपनाता है तो वह बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकता है। फल-सब्जी उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि आधारित उद्योगों में अपार संभावनाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने रासायनिक खाद के बजाय जैविक खेती और जैविक खाद के उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि जिन राज्यों में रासायनिक खाद का अत्यधिक उपयोग हो रहा है, वहां की उपज को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। रासायनिक खाद का अत्यधिक इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने किसानों और सरकार को मिलकर काम करने की जरूरत बताते हुए कहा कि खेती को लाभकारी बनाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए दोनों की साझी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक और नई पद्धतियों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। कृषि के क्षेत्र में नई-नई तकनीकों का विकास हो रहा है और किसानों को उसका लाभ उठाना चाहिए। कम पानी में अधिक उत्पादन, ड्रिप इरिगेशन तथा वैज्ञानिक तरीके से खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार की बिरसा हरित ग्राम योजना किसानों के लिए काफी लाभकारी साबित हो रही है। इस योजना के तहत अब तक करीब डेढ़ लाख एकड़ भूमि में फलदार पौधों और बागवानी आधारित खेती का विकास किया गया है। तीन-चार वर्षों के भीतर बड़े पैमाने पर यह कार्य पूरा किया गया है, जिससे किसानों को आय के नए स्रोत मिले हैं और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
उन्होंने कहा कि झारखंड में कृषि और बागवानी के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। यदि किसान आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं तो राज्य कृषि के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। सरकार किसानों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
जल संचय को जन आंदोलन बनाने की जरूरत
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे ज्यादा असर खेती-बाड़ी पर पड़ रहा है। झारखंड में लगभग 80 प्रतिशत लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में जल संचय को जन आंदोलन बनाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पीने के पानी और सिंचाई के लिए पानी की बड़ी चुनौती सामने आने वाली है। यदि अभी से जल संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में बड़ी संख्या में चापाकल सूख सकते हैं। इसलिए गांवों और बंजर जमीनों पर रिचार्ज पिट, सोख्ता पिट तथा वर्षा जल संचयन के कार्यों को बढ़ावा देना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि धरती से लगातार भूजल निकाला जा रहा है, इसलिए जितना पानी हम धरती से ले रहे हैं, उतना उसे वापस लौटाने की भी जिम्मेदारी हमारी है। उन्होंने किसानों से कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली तकनीकों, खासकर ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक सिंचाई पद्धतियों को अपनाने की अपील की।
शहरीकरण सबसे बड़ा अभिशाप
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनियंत्रित शहरीकरण सबसे बड़ा अभिशाप बनता जा रहा है। कंक्रीट के जंगल खड़े हो रहे हैं और लोग पत्थर तथा लोहे के बीच रहने को मजबूर हो रहे हैं। गांवों को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसानों की मैपिंग कर बेहतर कार्य करने वाले किसानों को मुख्यमंत्री की ओर से सम्मानित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग को निर्देश दिया कि किसानों के लिए एक विशेष पोर्टल तैयार किया जाए, जिसमें उनकी जिज्ञासाओं और समस्याओं का समाधान उपलब्ध हो।
इस अवसर पर कृषि सचिव अबू बकर सिद्दीकी ने कहा कि कृषि विभाग का प्रयास है कि सरकार की योजनाओं की जानकारी हर किसान तक पहुंचे। किसान एक-दूसरे से सीखें, इसी उद्देश्य से कृषि व्यापार मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेले में करीब 200 स्टॉल लगाए गए हैं और 13 विषयों पर सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। इसमें कृषि क्षेत्र के नए नवाचारों और आधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित किया गया है।
2000 करोड़ रुपये से अधिक का कृषि ऋण माफ
कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि किसानों को कृषि कार्य के लिए संस्थागत ऋण लेने से नहीं हिचकना चाहिए। झारखंड सरकार अब तक 2000 करोड़ रुपये से अधिक के कृषि ऋण की माफी कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि किसानों को खेती को व्यापार के रूप में आगे बढ़ाने के लिए बैंकों से ऋण लेना चाहिए। सरकार उन्हें हरसंभव सहायता देगी। किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत मिलने वाला ऋण ब्याजमुक्त है। उन्होंने कहा कि राज्य में दूध और मछली का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। साथ ही मड़ुआ की खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके लिए किसानों को प्रोत्साहन राशि उपलब्ध कराई जा रही है।
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 209 डिजिटल वर्कर्स को एआई किट वितरित की। वहीं, पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए लाभुकों के बीच गाय और भैंस का वितरण भी किया गया। कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह समेत कई जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक और बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।
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