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jharkhand Bulk Waste Generators, :बड़े कचरा उत्पादकों के लिए नयी व्यवस्था, नगर निकायों में सात दिन में बनेगी निगरानी सेल

20 हजार वर्गमीटर क्षेत्रफल, रोज 40 हजार लीटर पानी की खपत या 100 किलो कचरा पैदा करने वाले संस्थान दायरे में

by Nikhil Kumar
PROJECT BHAWAN
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नगर विकास विभाग में जारी किया स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर
रांची। झारखंड में बड़े पैमाने पर कचरा पैदा करने वाले संस्थानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और आवासीय परिसरों के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने नयी व्यवस्था लागू की है। विभाग ने झारखंड स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) फॉर बल्क वेस्ट जेनरेटर्स, 2026 जारी किया है। इसके तहत बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान, ऑनलाइन पंजीकरण, कचरे का पृथक्करण, प्रसंस्करण और निगरानी अनिवार्य की गयी है। इसका उद्देश्य शहरों में मिश्रित कचरे की समस्या कम करना और कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करना है।
तीन में से एक शर्त पूरी करने पर दायरे में आएंगे
एसओपी के अनुसार, 20 हजार वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले परिसर, प्रतिदिन 40 हजार लीटर या अधिक पानी की खपत करने वाले संस्थान अथवा रोज 100 किलो या उससे अधिक ठोस कचरा पैदा करने वाली इकाइयां बल्क वेस्ट जेनरेटर की श्रेणी में आएंगी। इनमें सरकारी भवन, शिक्षण संस्थान, मॉल, होटल, अस्पताल, हॉस्टल, विवाह भवन, कन्वेंशन सेंटर, थोक बाजार, स्टेडियम और आवासीय सोसाइटी जैसे परिसर शामिल हैं।

नगर निकायों में सात दिन में बनेगी निगरानी सेल
विभाग ने सभी नगर निगमों, नगर परिषदों, नगर पंचायतों और अधिसूचित क्षेत्र समितियों को एसओपी के पालन का निर्देश दिया है। अधिसूचना जारी होने के सात दिनों के भीतर प्रत्येक नगर निकाय में बल्क वेस्ट जेनरेटर मॉनिटरिंग सेल गठित करनी होगी। इसका नेतृत्व नगर आयुक्त, कार्यपालक पदाधिकारी या अधिकृत अधिकारी करेंगे। सेल में स्वच्छता, सूचना प्रौद्योगिकी, लेखा और संबंधित योजनाओं के अधिकारियों के साथ वार्ड स्तर के नोडल अधिकारी भी शामिल होंगे।
वार्ड स्तर पर बड़े कचरा उत्पादकों की पहचान, सर्वेक्षण, जियो-टैगिंग, कचरे की मात्रा का सत्यापन और नियमों के उल्लंघन की निगरानी की जाएगी। नगर निकायों को प्रत्येक वर्ष एक अप्रैल तक सूची अद्यतन करनी होगी।

गीला और सूखा कचरा अलग रखना अनिवार्य
नयी व्यवस्था के तहत कचरे को उसके प्रकार के अनुसार अलग-अलग रखना होगा। गीले कचरे में भोजन, रसोई, फल-सब्जियों और बगीचे से निकलने वाला जैविक कचरा शामिल होगा। वहीं, कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच और पैकेजिंग सामग्री को सूखे कचरे के रूप में अलग रखना होगा। सैनिटरी और घरेलू खतरनाक कचरे का भी अलग प्रबंधन करना होगा। जैविक कचरे का परिसर में ही कंपोस्टिंग या बायो-मीथनेशन के माध्यम से निस्तारण करने को प्राथमिकता दी गयी है। जहां यह संभव नहीं होगा, वहां निर्धारित नियमों के अनुसार अधिकृत प्रसंस्करण व्यवस्था का उपयोग करना होगा।

कचरे की मात्रा के आधार पर तय होंगी जिम्मेदारियां
एसओपी में प्रतिदिन कचरा उत्पादन के आधार पर चार श्रेणियां बनायी गयी हैं। 100 से 500 किलो कचरा पैदा करने वाली इकाइयां श्रेणी ए, 501 से 1000 किलो वाली श्रेणी बी, 1001 से 5000 किलो वाली श्रेणी सी और 5000 किलो से अधिक कचरा पैदा करने वाली इकाइयां श्रेणी डी में आएंगी। इनके लिए पंजीकरण, कचरे का वजन दर्ज करने, प्रबंधन योजना, परिवहन की निगरानी और ऑडिट जैसी अलग-अलग शर्तें निर्धारित की गयी हैं।
सभी पात्र बल्क वेस्ट जेनरेटर को संबंधित नगर निकाय और केंद्रीयकृत ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। कचरे के संग्रहण, परिवहन और अधिकृत प्रसंस्करण या पुनर्चक्रण केंद्र तक पहुंचने का रिकॉर्ड भी रखना होगा। नियमों के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने पर नगर निकाय ऑनलाइन प्रमाणपत्र जारी करेगा, जिसकी वैधता तीन वर्ष होगी। व्यवस्था में यूजर चार्ज, प्रमाणपत्र शुल्क और उल्लंघन की स्थिति में दंड या पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का भी प्रावधान किया गया है।

नगर विकास एवं आवास विभाग, सूडा के माध्यम से एसओपी के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा। नगर निकायों के प्रदर्शन की समीक्षा की जाएगी। इसके लिए पंजीकरण, कचरा पृथक्करण, गीले कचरे के प्रसंस्करण और प्रमाणपत्र संबंधी अनुपालन के आधार पर नगर निकायों की रैंकिंग भी प्रकाशित की जाएगी। इससे बड़े कचरा उत्पादकों की जवाबदेही तय करने और शहरी कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी।

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