
रांची : राज्य के सरकारी स्कूलों से बाहर रह चुके या पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को दोबारा मुख्यधारा से जोड़ने के लिए झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने कमर कस ली है। आगामी 10 नवंबर से शुरू हो रहे इस खास अभियान के तहत शिक्षक खुद आपके दरवाजे पर दस्तक देंगे।
10 नवंबर 2026 से संभावित तिथि।
किस उम्र के बच्चों के लिए: 3 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे।
डेटा कहां अपलोड होगा: ‘डहर’ पोर्टल पर ऑनलाइन।
किसके लिए बनेगा डेटा: आगामी शैक्षणिक सत्र (2027-28) के बजट और समग्र शिक्षा कार्ययोजना के लिए।
क्या है पूरा प्लान, जानिए कैसे होगा सर्वे
झारखंड सरकार का यह अभियान उन बच्चों की पहचान करने के लिए है, जो या तो कभी स्कूल नहीं गए या फिर किसी वजह से बीच में ही पढ़ाई छोड़ चुके हैं । राज्य परियोजना निदेशक शशि रंजन की ओर से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
पहले होगी गांवों और टोलों की मैपिंग
घर-घर सर्वे का काम शुरू होने से पहले स्थानीय स्तर पर मैपिंग की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
14 अक्टूबर तक गांवों, टोलों और मुहल्लों की टैगिंग सूची जारी करने का लक्ष्य।
25 अक्टूबर तक स्कूलों को उनके नजदीक क्षेत्र टैग किए जाएंगे।
किसी भी घर या टोले की दोहरी गिनती न हो और कोई भी घर सर्वे से छूटे नहीं, इसका विशेष ध्यान रखा जाएगा। जिन स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक हैं, उन्हें छोटे इलाके या कम परिवार सौंपे जाएंगे।
प्राइवेट और मदरसों के शिक्षक भी निभाएंगे जिम्मेदारी
इस बार सर्वे के दायरे को और व्यापक बनाया गया है। माध्यमिक, उच्च माध्यमिक, गैर-सरकारी सहायता प्राप्त, अल्पसंख्यक स्कूल, संस्कृत विद्यालय और मदरसों के शिक्षकों को भी इस काम में शामिल किया जाएगा। स्थानीय स्तर पर विद्यालय प्रबंध समिति और माता समिति के सदस्यों का सहयोग लिया जाएगा ताकि शिक्षकों को घर-घर पहुंचने में आसानी हो।
कस्तूरबा आवासीय विद्यालय, पीएमश्री और ‘स्कूल ऑफ एक्सीलेंस’ जैसे चुनिंदा 3,649 विशेष विद्यालयों को इस कार्य से अलग रखा गया है। सर्वे को त्रुटिहीन बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से ट्रेनिंग पूरी की जा रही है।

