
बोकारो : बोकारो जिले से प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक की ताजा ऑडिट रिपोर्ट ने योजना में चल रही बड़ी धांधली की परतें खोल दी हैं। सरकारी खजाने के पैसों का गलत इस्तेमाल और अयोग्य लोगों को फायदा पहुंचाने के कई मामले पकड़े गए हैं।
पुराना घर फिर भी मिला नया फंड
जरीडीह क्षेत्र की गायछंदा पंचायत का मामला सबसे अजीब है। यहां एक व्यक्ति को नया मकान बनाने के लिए 1.30 लाख रुपये दे दिए गए। हैरान करने वाली बात यह है कि उसकी पत्नी के नाम पहले से ही इंदिरा आवास दर्ज था। इसके बावजूद अफसरों ने बिना जांच के दोबारा सरकारी पैसा जारी कर दिया।
महज 9 दिन में बन गया मकान
सरकारी रिकॉर्ड का खेल भी कमाल का है। बांधडीह साउथ पंचायत में एक लाभार्थी को 8 फरवरी 2021 को आवास की मंजूरी मिली। पोर्टल पर दर्ज रिकॉर्ड के मुताबिक, 17 फरवरी को मकान बनकर तैयार भी हो गया! यानी सिर्फ 9 दिनों में पूरा घर खड़ा कर दिया गया। इस नाम पर 1.25 लाख रूपये की दो किश्तें भी निकाल ली गईं। जब जांच टीम जमीन पर पहुंची तो वहां कोई मकान नहीं था। पोर्टल पर दिए गए लोकेशन डेटा की जांच की गई तो पता चला कि जगह कोई मकान नहीं, बल्कि पंचायत कार्यालय का पता थी।
गरीबों के घर में चल रहा प्राइवेट स्कूल
सरकारी पैसों का गलत इस्तेमाल यहीं नहीं रुका। चिलगड्डा पंचायत में दो पड़ोसियों ने सरकारी मदद से मकान बनाए। जब अफसरों ने भौतिक जांच की तो पता चला कि उन घरों का इस्तेमाल प्राइवेट स्कूल चलाने के लिए किया जा रहा था। ना तस्वीरें अपलोड हुईं, ना ही मिला पानी का कनेक्शन। राजमिस्त्रियों की ट्रेनिंग के दौरान 1,101 मकान पूरे होने का दावा किया गया था। जब 40 रैंडम मकानों की जांच की गई तो 17 मकानों की जियो-टैग फोटो पोर्टल पर थी ही नहीं।
सुविधाओं के मामले में भी जमीनी हकीकत चिंताजनक है। साल 2016 से 2024 के बीच जिले में करीब 47,984 मकान स्वीकृत किए गए थे। रिपोर्ट बताती है कि इनमें से 44,409 घरों में पानी का कनेक्शन ही नहीं है। इसके अलावा, हजारों घर ऐसे हैं जो आज भी बिजली और रसोई गैस कनेक्शन के बिना हैं।

