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Jharkhand Crime: 18 पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोपी व 20 लाख का इनामी माओवादी रविंद्र गंझू गिरफ्तार, एके-56 समेत भारी मात्रा में हथियार बरामद

रविंद्र गंझू पर 18 पुलिसकर्मियों की हत्या के अलावा लातेहार, पलामू, लोहरदगा, गुमला और रांची समेत विभिन्न जिलों के थानों में नक्सली हिंसा, हत्या, विस्फोट और हथियार लूट से जुड़े 154 से अधिक मामले दर्ज हैं।

by Kanchan Kumar
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लातेहार : पलामू प्रमंडल में माओवादियों का करारा झटका लगा है। 20लाख का इनामी माओवादी रविंद्र गंझू को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। उसके पास से AK-56 समेत भारी मात्रा में हथियार बरामद किए गए हैं। सुरक्षाबलों के लिए यह बहुत बड़ी सफलता मानी जा रही है। लगभग 16 साल से सक्रिय इनामी नक्सली रविंद्र गंझू पुलिस को चकमा देकर भागा फिर रहा था। वह 154 मामलों में आरोपी है। माओवादी रविंद्र गंझू का नेटवर्क कई जिलों में फैला था।

मंगलवार को आयोजित प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव ने बताया कि उन्हें गुप्त सूचना मिली थी कि रविंद्र गंझू अपने घर आया हुआ है। कोबरा-209 बटालियन के उप कमांडेंट दीपक कुमार के नेतृत्व में पुलिस और सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने उसके घर की घेराबंदी कर छापेमारी। पुलिस की रणनीति पूर्णतः सफल रही। बिना किसी नुकसान के उसे गिरफ्तार कर लिया।

प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के रीजनल कमेटी सदस्य और 20 लाख रुपये का इनामी रविंद्र गंझू के पास से एक एके-56 राइफल, एक पिस्टल, एक अन्य राइफल, 239 कारतूस तथा अन्य नक्सली सामग्री बरामद की गई है। रविंद्र लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र स्थित हेसला बांझीटोला गांव का निवासी है।

हत्या, हथियार लूट समेत 154 से अधिक मामले हैं दर्ज

एसपी ने बताया कि रविंद्र गंझू पिछले 16 वर्षों से माओवादी संगठन में सक्रिय था और संगठन का महत्वपूर्ण सदस्य माना जाता था। उस पर 18 पुलिसकर्मियों की हत्या का आरोप है। इसके अलावा लातेहार, पलामू, लोहरदगा, गुमला और रांची समेत विभिन्न जिलों के थानों में नक्सली हिंसा, हत्या, विस्फोट और हथियार लूट से जुड़े 154 से अधिक मामले दर्ज हैं।

उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान रविंद्र से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं। उसके आधार पर संगठन के अन्य सदस्यों और गतिविधियों के संबंध में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

काफी कमजोर हो चुका है माओवादी संगठन

सुरक्षा बलों के लगातार अभियान से माओवादियों की कमर टूट गई है। इसके ज्यादातर बड़े नेता या तो मारे जा चुके हैं या फिर गिरफ्तार हो चुके हैं। बड़ी संख्या में माओवादी पुलिस दबिश के बाद समय समय पर सरेंडर भी करते रहे हैं। संगठन काफी कमजोर हो चुका है। रविंद्र गंझु पुलिस से बचने के लिए भागा फिर रहा था। लेकिन वह भी बहुत दिनों तक बच नहीं सका। उन्होंने क्षेत्र में सक्रिय बचे उग्रवादियों से आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने की अपील की और कहा कि सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाने का यह उचित समय है।

प्रेस वार्ता में मौजूद सीआरपीएफ के डीआईजी पंकज कुमार ने कहा कि क्षेत्र में सक्रिय बचे नक्सलियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि उग्रवादियों के पास आत्मसमर्पण का अवसर है, अन्यथा कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इन प्रमुख घटनाओं में रहा है शामिल

7 नवंबर 2011:- राजकीय मध्य विद्यालय परिसर में पुलिस दल पर हमला, बम विस्फोट से स्कूल भवन ध्वस्त, सात जवान घायल।
1 फरवरी 2012:- घाघू में आईईडी विस्फोट कर सुरक्षाबलों के वाहन को उड़ाया, तीन पुलिसकर्मी शहीद।
7 जनवरी 2013:- कटिया जंगल मुठभेड़ में 11 सीआरपीएफ जवान शहीद और 15 घायल।
12 जून 2013:- कुमण्डीह रेलवे स्टेशन के पास मालगाड़ी की आड़ लेकर करीब 45 मिनट तक पुलिस पर फायरिंग।
22 नवंबर 2019:- चंदवा में पीसीआर वैन पर हमला, चार गृहरक्षक शहीद और हथियार लूटे।
16 जनवरी 2021:- बंदरलेटा जंगल में लैंडमाइन विस्फोट, जिसमें सांझो देवी की मौत हुई।
20 नवंबर 2021:- डेमू-रिचुघुटा रेलखंड पर विस्फोट कर रेलवे ट्रैक को क्षतिग्रस्त किया।
14 मई 2022:- लेवी नहीं मिलने पर बॉस्करचा प्लांट में नौ वाहनों में आग लगाई।

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