Jamshedpur : पूर्वी सिंहभूम जिले के चाकुलिया प्रखंड में बड़े पैमाने पर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाले का खुलासा हुआ है। इस मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए चाकुलिया प्रखंड से जारी किए गए 4281 फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों को रद्द करने का आदेश दिया है। उपायुक्त अनन्य मित्तल ने इन प्रमाण पत्रों को तुरंत रद्द करने का निर्देश रजिस्ट्रार को दिया है। इसके साथ ही उन्होंने इन प्रमाण पत्रों की सार्वजनिक सूची जारी करने को कहा है, ताकि अन्य विभाग भी इनकी जांच कर सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनका उपयोग किसी सरकारी योजना का लाभ लेने में तो नहीं हुआ।
SIT करेगी मामले की जांच

फर्जीवाड़े की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है जिसमें दो डीएसपी, दो इंस्पेक्टर और एक सब-इंस्पेक्टर शामिल हैं। एसएसपी किशोर कौशल ने बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र बनाने में शामिल लोगों की लंबी सूची तैयार की जा रही है। सोनारी के एक व्यक्ति की संलिप्तता भी सामने आई है।
पंचायत सचिव समेत 5 लोग भेजे गए जेल

इस घोटाले में पंचायत सचिव सुनील महतो सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। गिरफ्तार अन्य लोगों में मटियाबांधी और मालकुंडी पंचायत के प्रज्ञा केंद्र संचालक शिवम डे और सपन महतो, बिचौलिया बुंडू के हरीश प्रमाणिक और रांची के आरिफ आलम शामिल हैं। जन्म प्रमाण पत्र बनाने में इस्तेमाल हुए कंप्यूटर और अन्य उपकरण भी जब्त कर लिए गए हैं।
एसडीओ की जांच में खुलासा

जांच की शुरुआत तब हुई जब निजी स्कूलों में दाखिले के लिए जमा किए गए जन्म प्रमाण पत्रों की सत्यता को लेकर डीसी कार्यालय ने जांच करवाई। चाकुलिया बीडीओ को भेजे गए 149 प्रमाण पत्रों में से 106 फर्जी पाए गए। इनमें कई मुस्लिम नामों से बनाए गए प्रमाण पत्र भी शामिल थे, जबकि मटियाबांधी पंचायत में मुस्लिम आबादी नहीं है। इसके बाद एसडीओ घाटशिला के नेतृत्व में टीम बनाई गई और बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र सामने आए।
3874 प्रमाण पत्र बहुसंख्यकों के नाम पर
एसएसपी किशोर कौशल के अनुसार, बनाए गए फर्जी प्रमाण पत्रों में से 3874 बहुसंख्यक समुदाय के हैं, जबकि 682 प्रमाण पत्र अल्पसंख्यकों के नाम पर बने हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल अल्पसंख्यकों के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने की बात ठीक नहीं है।
अभिभावकों पर भी होगी कार्रवाई
जिन अभिभावकों ने गलत मंशा से ये फर्जी प्रमाण पत्र बनवाए हैं, उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कुछ मामलों में आवेदनकर्ताओं को यह जानकारी नहीं थी कि उनका प्रमाण पत्र किस तरह से जारी किया गया, लेकिन जिन्होंने जानबूझ कर उम्र घटाकर स्कूल में दाखिला दिलाने के उद्देश्य से प्रमाण पत्र बनवाए हैं, उन्हें नहीं बख्शा जाएगा।
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