
Jamshedpur : झारखंड में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। झारखंड अधिविद्य परिषद, रांची ने झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) 2026 को लेकर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए नियमों में अहम बदलाव किए हैं। साथ ही ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि भी आगे बढ़ा दी गई है, जिससे अधिक से अधिक अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके। परिषद के अनुसार, यह निर्णय उच्चतम न्यायालय के विभिन्न मामलों में दिए गए अंतरिम आदेशों और राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा प्रदान की गई छूट के आधार पर लिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब 60 वर्ष तक की आयु वाले कार्यरत सहायक शिक्षक और पारा शिक्षक भी जेटेट परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।
पात्रता के लिए इन-सर्विस प्रशिक्षण, डीपीई उत्तीर्ण या National Institute of Open Schooling से शिक्षक प्रशिक्षण के साथ 6 माह का ब्रिज कोर्स अनिवार्य किया गया है। ऐसे अभ्यर्थियों के लिए आवेदन से जुड़े प्रावधान आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
जैक ने यह भी स्पष्ट किया है कि पूर्व में आवेदन कर चुके अभ्यर्थियों को दोबारा आवेदन करने की आवश्यकता नहीं है, जबकि पहले जारी सभी नियम यथावत लागू रहेंगे।
आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी
झारखंड अधिविद्य परिषद ने जेटेट 2026 के लिए अभ्यर्थियों को राहत देते हुए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 20 जुलाई 2026 कर दी है। परिषद के अनुसार, अभ्यर्थियों से आवेदन पत्र में त्रुटियों को सुधारने को लेकर कई शिकायतें प्राप्त हो रही थीं, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। जैक ने सुधार के लिए दो श्रेणियां निर्धारित की हैं। यदि कोई अभ्यर्थी अपनी कोटि या लेवल-1 अथवा लेवल-2 में बदलाव करना चाहता है, तो उसे पहले पुराना आवेदन रद्द कर नया आवेदन भरना होगा। इस प्रक्रिया में निर्धारित शुल्क देय होगा।
परिषद के अनुसार, नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्म तिथि, पता और परीक्षा के विषय जैसे सामान्य विवरणों में संशोधन की अनुमति दी जाएगी। ऐसे सुधारों का परीक्षा शुल्क पर कोई अतिरिक्त प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह सुविधा केवल 20 जुलाई 2026 तक ही उपलब्ध रहेगी।
उम्र सीमा में भारी छूट
पहले सामान्य अभ्यर्थियों की तरह कार्यरत शिक्षकों के लिए भी एक निश्चित उम्र सीमा (जैसे 35 से 40 वर्ष, कोटवार छूट के साथ) तय थी। इसके कारण बड़ी संख्या में ऐसे पारा शिक्षक परीक्षा में बैठने से वंचित हो जा रहे थे जो पिछले 15-20 सालों से सेवा दे रहे हैं और अपनी उम्र के 45 या 50 वर्ष पार कर चुके हैं। नए नियम के तहत उम्र सीमा की बाध्यता को पूरी तरह खत्म करते हुए इसे सीधे 60 वर्ष (रिटायरमेंट की उम्र तक) कर दिया गया है। यानी सेवाकाल के आखिरी पड़ाव पर खड़ा शिक्षक भी अब परीक्षा दे सकेगा।

