
रांची : झारखंड में 2016 की स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा फिर चर्चा में है। इस विवाद में गठित वन मैन फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के अध्यक्ष सेवानिवृत जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को नई मेरिट लिस्ट जमा करने का आदेश दिया है। यह सूची सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में बनाई जानी है। इसमें विषयवार और कोटिवार संशोधित स्टेट वाइज मेरिट लिस्ट शामिल होनी चाहिए।
शनिवार को इस केस पर ऑनलाइन सुनवाई हुई। राज्य सरकार के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने आयोग के समक्ष अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि पूर्व की नियुक्तियां JSSC द्वारा उपलब्ध कराए गए डाटा के आधार पर की गई थीं। सरकार इस विषय पर एक शपथ पत्र दायर करना चाहती है। इसके लिए सरकार की ओर से दो सप्ताह का समय मांगा गया। आयोग ने समय देते हुए अगली सुनवाई 26 सितंबर तय कर दी।
अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता और अधिवक्ता राजेश कुमार ने ऑनलाइन पक्ष रखा। इससे पहले हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने मीना कुमारी और अन्य 257 याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इस जांच आयोग का गठन किया था। सेवानिवृत्त जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को इस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था।
हाईकोर्ट ने आयोग को 3 महीने के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट देने को कहा था। हालांकि तय समय सीमा खत्म हो गई थी। इस पर न्यायमूर्ति दीपक रोशन की कोर्ट ने आयोग को 3 महीने का अतिरिक्त समय दे दिया है।
इस कदम से शिक्षक भर्ती में पारदर्शिता आने की उम्मीद है। पुरानी प्रक्रिया की गलतियों को सुधारा जा रहा है। जेएसएससी द्वारा नई मेरिट लिस्ट सौंपने के बाद अभ्यर्थियों की स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी।
अब सभी की नजरें 26 सितंबर की सुनवाई पर टिकी हैं। उस दिन सरकार अपना हलफनामा पेश करेगी। साथ ही आयोग नई स्टेट वाइज मेरिट लिस्ट का अध्ययन करेगा।

