
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की बात सामने आई है। सीआईडी की रिमांड पूछताछ में गिरफ्तार एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (टीडीपीएल) के अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने कई चौंकानेवाली जानकारियां दी हैं। आरोपी अभय कुमार तिवारी ने खुलासा किया है कि कई अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में पास कराने के नाम पर प्रति छात्र 15 लाख रुपये तक की वसूली की गई थी।
अफसरों, कोचिंग और एजेंसी का गठजोड़
CID के अनुसार, इस पूरे खेल को एक संगठित सिंडिकेट चला रहा था। आरोपी ने दावा किया है कि इस गिरोह में जेपीएससी के पूर्व आलाधिकारियों, निजी परीक्षा एजेंसी टीडीपीएल के निदेशकों और कोचिंग संचालकों की सीधी साठगांठ थी। अलग-अलग चरणों के अलग- अलग रेट तय थे। पीटी पास कराने के लिए 2 से 5 लाख (कैटेगरी के अनुसार) और अंतिम रूप से चयन दिलाने के लिए 60 से 70 लाख रुपये तक की डीलिंग होती थी। इंटरव्यू में नंबर बढ़वाने के काम को अंजाम अधिकारियों के पीए, कोचिंग संचालकों और स्थानीय बिचौलियों के जरिए दिया जाता था।
अभ्यर्थियों के सीक्रेट कोड को डी-कोड करके मनचाहे नंबर दिलाने में एजेंसी के प्रमुखों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सीआईडी अब इस बयान के आधार पर सिंडिकेट के अन्य प्रमुख चेहरों और पैसों के लेनदेन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।\
अभय की रिमांड अवधि बढ़ी
झारखंड की दो सबसे चर्चित प्रतियोगी परीक्षाओं जेएसएससी – सीजीएल और जेपीएससी में सीआईडी और विशेष जांच दल ने कार्रवाई तेज कर दी है। जेएसएससी – सीजीएल पेपर लीक मामले में अभय से फिर पूछताछ की जा रही है।टीडीपीएल कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर और घोटाले के मुख्य आरोपी अभय तिवारी की रिमांड अवधि सीआईडी ने तीन दिनों के लिए और बढ़ा दी है। अभय की पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय तिवारी से लंबी पूछताछ पूरी होने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत (जेल) भेज दिया गया है।
60 से अधिक संदिग्धों पर शिकंजा
एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे के नेतृत्व में गठित एसआईटी 60 से अधिक संदिग्धों से बयान दर्ज करा चुकी है। अभय ने पहले ही कबूला था कि रुपये लेकर बोकारो के सेंटरों पर अभ्यर्थियों को उत्तर रटवाए गए थे।
वेबेल के मालिक की तलाश
परीक्षा कराने वाली एजेंसी ‘वेबेल’ के फरार मालिक मिथिलेश सिंह को तलाशने के लिए सीआईडी लगातार छापेमारी कर रही है।

