- अलग तरीके से अब मानसून सीजन को बेहतर अवसर के रूप में देख रही सरकार
- बारिश के दिनों में अपने चरम पर होती है प्रदेश की प्राकृतिक सुंदरता
- अन्य जगहों के अलावा नेतरहाट, पारसनाथ व पतरातू में भी बढ़ जाती है पर्यटकों की रुचि
- स्थानीय रोजगार व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर किया जा रहा फोकस
Ranchi : हेमंत सरकार अब झारखंड को देश के सबसे सुरक्षित और आकर्षक मानसून पर्यटन स्थलों में शामिल करने की दिशा में काम कर रही है। पर्यटन विभाग की रणनीति है कि झारखंड को सेफेस्ट मानसून डेस्टिनेशन के रूप में राष्ट्रीय स्तर पर प्रचारित किया जाए, ताकि बरसात के मौसम में भी बड़ी संख्या में पर्यटक राज्य का रुख करें। दरअसल, देश के कई पहाड़ी राज्यों में मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़क धंसने और बाढ़ जैसी समस्याओं के कारण पर्यटन प्रभावित होता है। इसके विपरीत झारखंड में बड़े पैमाने पर लैंडस्लाइड की समस्या नहीं होती और अधिकतथ पर्यटन स्थलों तक पहुंच अपेक्षाकृत सुरक्षित बनी रहती है। यही कारण है कि सरकार अब मानसून सीजन को पर्यटन के लिए अवसर के रूप में देख रही है।
पर्यटन विभाग का मानना है कि बारिश के दिनों में झारखंड की प्राकृतिक सुंदरता अपने चरम पर होती है। राज्य के प्रसिद्ध झरने, घने जंगल, पहाड़ियां, डैम और जलाशय इस मौसम में सबसे अधिक आकर्षक दिखाई देते हैं। हुंडरू, दशम, जोन्हा, लोध, पंचघाघ और हिरनी जैसे जलप्रपातों में बरसात के दौरान पानी का प्रवाह कई गुना बढ़ जाता है, जिससे इन स्थलों की खूबसूरती और निखर जाती है। नेतरहाट, पारसनाथ, पतरातू अदि घाटियां और विभिन्न ईको-टूरिज्म स्थलों में भी इस दौरान पर्यटकों की रुचि बढ़ती है। पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि यदि मानसून टूरिज्म अभियान सफल रहा तो झारखंड केवल धार्मिक पर्यटन ही नहीं, बल्कि प्रकृति और ईको-टूरिज्म के क्षेत्र में भी देश के प्रमुख पर्यटन राज्यों में अपनी अलग पहचान बना सकेगा।

पर्यटन सीजन की अवधि बढ़ाने पर जोर
सरकार की योजना केवल पर्यटन स्थलों के प्रचार तक सीमित नहीं है। इसके तहत पर्यटन सीजन की अवधि बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। अब तक झारखंड में पर्यटन का मुख्य सीजन अक्टूबर से फरवरी तक यानी लगभग पांच महीने माना जाता था। विभाग चाहता है कि इसे बढ़ाकर जुलाई से फरवरी तक किया जाए, ताकि वर्ष के अधिक समय तक होटल, रिसॉर्ट, ट्रैवल ऑपरेटर, स्थानीय बाजार और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसाय सक्रिय रहें।
इससे स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। राज्य सरकार ईको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म को भी बढ़ावा देने की तैयारी में है।
बढ़ती संभावनाओं को दर्शा रहे आंकड़े
पर्यटकों की संख्या के आंकड़े भी झारखंड में पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को दर्शाते हैं। झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार वर्ष 2024 में राज्य में करीब 540.41 लाख (5.40 करोड़) घरेलू पर्यटक पहुंचे, जो 2023 के 357.76 लाख पर्यटकों की तुलना में लगभग 51 प्रतिशत अधिक है। जनवरी से नवंबर 2025 के बीच ही 531.72 लाख घरेलू पर्यटकों के आगमन का आंकड़ा दर्ज किया गया। देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रावणी मेले के दौरान हर वर्ष लगभग 50 लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं।
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