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Solid Waste Management : झारखंड में ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 को धरातल पर लाने की तैयारी तेज, शहरों से पंचायतों तक बनेगी नई व्यवस्था

by Nikhil Kumar
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रांची : केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित ठोस अपशिष्ट (कचरा) प्रबंधन नियम-2026 को राज्यभर में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए झारखंड सरकार ने तैयारी तेज कर दी है। शहरी निकायों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी नए नियमों के क्रियान्वयन की कार्ययोजना पर काम कर रहा है। नगर विकास विभाग एवं पंचायती राज विभाग के अंतर्गत जिला परिषद इस दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है। विभिन्न जिलों और नगर निकायों से प्राप्त कार्ययोजनाओं का संकलन कर भारत सरकार को भेजा जा रहा है, जबकि शेष प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। नए नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में लागू हैं और इनका उद्देश्य वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन, पुनर्चक्रण, प्रदूषण में कमी तथा कचरे के सुरक्षित निस्तारण को बढ़ावा देना है। इसके साथ शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म कार्य योजना तैयार की जा रही है।राज्य स्तर पर नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी के लिए समिति का गठन और नियमित प्रगति रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है।

नए नियमों के तहत राज्य में चार-स्तरीय कचरा पृथक्करण, घर-घर कचरा संग्रहण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और डिजिटल निगरानी व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में ग्राम पंचायतों और जिला परिषदों की भूमिका भी तय की गई है, ताकि गांवों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था विकसित हो सके।

विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह ने पंचायती राज विभाग को निर्देश दिया कि ग्रामीण क्षेत्रों से फॉर्म-4 के तहत आवश्यक सूचनाएं जिला परिषदों के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने सभी उपायुक्तों को अपने-अपने जिलों में नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन की निगरानी करने तथा शहरी निकायों में चार श्रेणियों में कचरा पृथक्करण की व्यवस्था लागू करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कराने को कहा है।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 की प्रमुख बातें

हर घर, दुकान, कार्यालय और संस्थान में गीला, सूखा, स्वच्छता (सैनिटरी) और विशेष देखभाल अपशिष्ट का चार-स्तरीय पृथक्करण अनिवार्य

नगर निकायों के साथ-साथ ग्राम पंचायतों को भी घर-घर कचरा संग्रहण, पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था विकसित करनी होगी।

20 हजार वर्गमीटर या अधिक क्षेत्रफल, 40 हजार लीटर प्रतिदिन जल उपयोग अथवा 100 किलोग्राम प्रतिदिन से अधिक कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को थोक अपशिष्ट उत्पादक माना गया है और उन्हें अपने परिसर में ही गीले कचरे का प्रसंस्करण करना होगा।

‘प्रदूषक भुगतान सिद्धांत’ के तहत नियमों के उल्लंघन पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति (जुर्माना) का प्रावधान किया गया है।

कचरा संग्रहण से लेकर परिवहन, प्रसंस्करण, निस्तारण और पुराने डंपिंग स्थलों के बायो-माइनिंग तक पूरी प्रक्रिया की ऑनलाइन ट्रैकिंग और निगरानी होगी।

मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) को औपचारिक मान्यता दी गई है, जहां सूखे कचरे की छंटाई और पुनर्चक्रण किया जाएगा।

सीमेंट और अपशिष्ट-से-ऊर्जा संयंत्रों में कचरे से बने ईंधन (आरडीएफ) के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाना होगा।

केवल गैर-पुनर्चक्रणीय, गैर-ऊर्जा पुनर्प्राप्त योग्य और अक्रिय अपशिष्ट ही लैंडफिल में डाला जा सकेगा।

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