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Jhinkpani Cement Plant : झींकपानी सीमेंट प्लांट बंदी का मामला: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिला प्रतिनिधिमंडल, सरकार उठाएगी सकारात्मक कदम

प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को विस्तार से बताया कि यदि यह प्लांट बंद होता है, तो पूरे क्षेत्र में रोजगार का भीषण संकट खड़ा हो जाएगा और हजारों लोगों के सामने आजीविका का सवाल उठ खड़ा होगा

by Rajeshwar Pandey
Jhinkpani Cement Plant
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चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के झींकपानी स्थित एसीसी अडानी सीमेंट प्लांट (चाईबासा सीमेंट वर्क्स) पर मंडरा रहे बंदी के संकट के बीच प्रभावित ग्रामीणों और मजदूरों के लिए एक बड़ी राहत की खबर आई है। प्लांट को बंद होने से बचाने की मांग को लेकर प्रभावित मजदूरों, रैयतों और स्थानीय ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को रांची में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से उनके आवासीय कार्यालय में मुलाकात की।

इस महत्वपूर्ण बैठक का समन्वय स्थानीय विधायक और राज्य सरकार के मंत्री दीपक बिरुवा के सहयोग से किया गया था। मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को विस्तार से बताया कि यदि यह प्लांट बंद होता है, तो पूरे क्षेत्र में रोजगार का भीषण संकट खड़ा हो जाएगा और हजारों लोगों के सामने आजीविका का सवाल उठ खड़ा होगा।

मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस विषय पर पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि झींकपानी प्लांट को चालू रखने के लिए सरकार की ओर से हरसंभव, प्रभावी और सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री के इस ठोस आश्वासन के बाद प्रभावित परिवारों और मजदूरों में उम्मीद की एक नई किरण जगी है।

क्यों गहराया है संकट?

गौरतलब है कि झींकपानी स्थित चाईबासा सीमेंट वर्क्स में फिलहाल उत्पादन पूरी तरह से ठप है। कंपनी प्रबंधन ने बीते 15 जून को एक आधिकारिक नोटिस जारी कर आगामी 16 अगस्त 2026 से कारखाने को पूरी तरह से बंद (पूर्ण लॉकडाउन) करने का ऐलान किया है। प्रबंधन के इस अचानक लिए गए फैसले से सीधे तौर पर काम करने वाले करीब 1,600 मजदूरों के अलावा अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हजारों लोगों के भविष्य पर तलवार लटक गई है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि यह कारखाना इस पूरे इलाके की आर्थिक रीढ़ है, और इसके बंद होने से क्षेत्र में बड़ा आर्थिक संकट पैदा हो जाएगा।

मुख्यमंत्री से मिलने वाले इस शिष्टमंडल में मुख्य रूप से रैयत तुराम बिरुली और मजदूर प्रतिनिधि बीरबल गोप समेत कई प्रभावित ग्रामीण और श्रमिक शामिल थे। सभी ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार के दखल के बाद अब इस फैक्टरी को बंद होने से बचा लिया जाएगा।

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