
Jamshedpur : लौहनगरी जमशेदपुर के खुंटाडीह स्थित बेशकीमती जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे करीब सवा सौ साल पुराने ऐतिहासिक विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा हस्तक्षेप किया है।
शीर्ष अदालत ने टाटा स्टील लिमिटेड की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए विवादित स्थल पर यथास्थिति (स्टेटस-क्वे) बनाए रखने का अंतरिम आदेश जारी किया है। जस्टिस एमएम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली इस याचिका पर केंद्र सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि मामले के लंबित रहने तक उक्त भूमि पर किसी भी प्रकार का नया कानूनी अधिकार सृजित नहीं किया जाएगा।
1912 के अधिग्रहण से जुड़ी है विवाद की जड़
सुप्रीम कोर्ट में टाटा स्टील की ओर से पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी और नीरज किशन कौल ने दलील दी कि खुंटाडीह की इस जमीन का इतिहास साल 1912 से जुड़ा है। तब टाटा टाउनशिप की स्थापना के लिए इस भूमि का विधिवत अधिग्रहण किया गया था। कंपनी के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 1944 में किराएदारी कानून की धारा 50 के तहत मुआवजा देकर काश्तकारी अधिकारों को समाप्त कर दिया गया था और कंपनी ने पुन: कब्जा प्राप्त कर लिया था।
टाटा स्टील का तर्क: जब पूर्व के किराएदारों की याचिकाएं और पुनर्विचार याचिकाएं देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) से पहले ही खारिज हो चुकी हैं, तो अब राजस्व अभिलेखों (रेवेन्यू रिकार्ड) में सुधार के बहाने नए सिरे से विवाद खड़ा करना कानूनन पूरी तरह गलत है।
वर्तमान में सेना के पास है जमीन का वास्तविक कब्जा
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट के सामने एक बेहद महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किया। उन्होंने पीठ को बताया कि वर्तमान में इस विवादित भूमि का एक बड़ा हिस्सा सैन्य अधिकारियों के वास्तविक कब्जे में है।
[16/07, 3:53 pm] Arvind Shrivastava: सुप्रीम कोर्ट ने जमशेदपुर के खुंटाडीह स्थित 125 साल पुराने जमीन विवाद में यथास्थिति बनाए रखने का अंतरिम आदेश दिया है।

