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JPSC-JSSC Protest: सरकार व छात्रों के बीच वार्ता से पहले सियासत तेज,मंत्री ने डेलिगेशन पर उठाए सवाल

राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बातचीत के अभ्यर्थियों द्वारा तैयार प्रतिनिधिमंडल की सूची पर कड़ा ऐतराज जताया है।

by Kanchan Kumar
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रांची : जेपीएससी- जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी को लेकर सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के बीच प्रस्तावित बातचीत से ठीक पहले सियासी पारा गरम हो गया है। राज्य सरकार के मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने बातचीत के अभ्यर्थियों द्वारा तैयार प्रतिनिधिमंडल की सूची पर कड़ा ऐतराज जताया है।

​सरकार का रुख स्पष्ट करते हुए मंत्री सुदिव्य सोनू ने कहा कि हेमंत सरकार अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर पूरी तरह गंभीर और संवेदनशील है। हम अभ्यर्थियों से सीधे संवाद कर समाधान निकालने के लिए तत्पर हैं, लेकिन किसी भी बाहरी तत्व को इस बातचीत का हिस्सा नहीं बनने दिया जाएगा।

अभ्यर्थियों द्वारा सौंपी गई वार्ता सूची पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें अभ्यर्थियों के बजाय अन्य लोगों को प्राथमिकता दी गई है। सीधे तौर पर पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार का नाम सूची में शामिल किए जाने पर पूछा कि किसी वकील या बाहरी व्यक्ति की इस छात्र संवाद में क्या भूमिका है?

कहा-वार्ता सिर्फ अभ्यर्थियों से होगी

उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे प्रदर्शन की आड़ में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और कोचिंग संचालक अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं। मंत्री के अनुसार, यह आंदोलन अब अभ्यर्थियों का न रहकर पर्दे के पीछे से नियंत्रित किया जा रहा है। ​सरकार ने साफ कर दिया है कि वह टेबल टॉक्स के लिए दरवाजे खुले रखेगी, लेकिन वार्ता की मेज पर केवल वास्तविक अभ्यर्थी ही बैठेंगे।

छात्रों ने सरकार से बातचीत के लिए अपना 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तय किया है। इस प्रतिनिधिमंडल में 8 छात्र, एक अधिवक्ता और दो तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। प्रतिनिधिमंडल की सूची अनुमंडल पदाधिकारी को सौंप दी गई थी।
जिन आठ छात्र प्रतिनिधियों का चयन किया गया है उनमें पीयूष कुमार सिंह,रविन्द्र पासवान,राजेश प्रसाद,नीतू कुजूर,कार्तिक सोरेन,रविन्द्र,अंकित कुमार,शालू सिंह तथा तकनीकी और कानूनी पक्ष रखने के लिए विशेषज्ञ भी शामिल हैं।

छात्रों ने वार्ता के लिए केवल छात्र प्रतिनिधियों को ही नहीं चुना है, बल्कि अपने पक्ष को प्रभावी ढंग से रखने के उद्देश्य से एक अधिवक्ता और दो तकनीकी विशेषज्ञों को भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल किया है। इनकी मौजूदगी से परीक्षा प्रक्रिया में कथित तकनीकी खामियों, अनियमितताओं के आरोपों और कानूनी पहलुओं पर सरकार के समक्ष विस्तृत और तथ्यात्मक पक्ष रखा जा सकेगा।
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