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JPSC-JSSC भर्ती घोटाले में CID को मिले अहम सुराग, जानिए धांधली में सिंडिकेट कैसे कर रहा था काम

OMR-OSM शीट में छेड़छाड़ से रिजल्ट बदलने का आरोप, 16 लोगों के सिंडिकेट की जांच में जुटी CID, खंगाले जा रहे करोड़ों की वसूली और निवेश के नेटवर्क

by Kanchan Kumar
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​रांची: झारखंड की सबसे चर्चित JPSC और JSSC भर्ती धांधली जांच में सीआईडी को बेहद अहम सुराग मिले हैं। मामले में पकड़े गए आरोपी मोहम्मद एबाद ने पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसके बयान से इस पूरे खेल के असली मास्टरमाइंड अतुल वत्स का नाम खुलकर सामने आ गया है।

ओएमआर शीट में धांधली के पीछे काम कर रहा था सिंडिकेट

पूछताछ में एबाद ने साफ किया कि जेपीएससी परीक्षा में ओएमआर और ओएसएम शीट के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की गई थी। इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने में अतुल वत्स और मिथिलेश सिंह ने मुख्य भूमिका निभाई थी। सीआईडी की जांच में पता चला है कि यह कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं, बल्कि पूरे 16 शातिर लोगों का एक बड़ा सिंडिकेट है।

​इस सिंडिकेट में रामबीर सिंह, अरविंद कुमार, राजेश सिंह, आदित्य पांडेय, सुनील कुमार, संतोष सिंह, ब्रजेश कुमार, अली, इमरान, अजय संग्राम सिंह, प्रमोद पाठक, कृष्णा यादव और मोहम्मद उस्मान जैसे लोग शामिल हैं। यह पूरा नेटवर्क मिलकर परीक्षाओं के नतीजे बदलने का खेल खेलता था।

​कई राज्यों में फैला है अतुल वत्स का जाल

अतुल वत्स को तमाड़ पुलिस ने उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप में 164 अन्य लोगों के साथ पकड़ा था। पुलिस ने उसे सॉल्वर गिरोह का सरगना घोषित किया है। सीआईडी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि क्या जेपीएससी की अन्य परीक्षाओं में भी उसका हाथ था।
​अतुल वत्स का आपराधिक रिकॉर्ड बेहद पुराना और बड़ा है। वह केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में भी भर्ती घोटालों को अंजाम दे चुका है। इनमें राजस्थान क्लर्क भर्ती 2017, नीट पेपर लीक 2024, बिहार सीएचओ भर्ती 2024, यूपी आरओ/एआरओ परीक्षा और यूपी सिपाही भर्ती 2024 जैसी बड़ी परीक्षाएं शामिल हैं।

​अभय तिवारी का फैला आर्थिक साम्राज्य

इसी जांच की दूसरी कड़ी में घोटाले के मुख्य सरगना अभय तिवारी के काले साम्राज्य की परतें भी खुल रही हैं। अभय तिवारी टीडीपीएल (TDPL) कंपनी का मार्केटिंग मैनेजर था। उसने परीक्षा में धांधली करके करोड़ों रुपये कमाए। सीआईडी के अनुसार उसने इस काली कमाई को सफेद करने के लिए अलग-अलग बिजनेस में भारी निवेश किया है।

​अभय तिवारी ने जमशेदपुर में दो मार्ट खोले हैं। इसके अलावा लातेहार में दो शराब की दुकानों में उसका पैसा लगा हुआ है। इस पूरे कारोबार में आशीष नाम का एक बड़ा साझेदार है। खास बात यह है कि आशीष का भाई पुलिस विभाग में एक सीनियर आईपीएस अफसर का बॉडीगार्ड है। इसी ऊंचे रसूख का फायदा उठाकर इस अवैध धंधे को बेखौफ चलाया जा रहा था।

​साढ़े पांच करोड़ की वसूली और फैला नेटवर्क

अभय तिवारी ने सीआईडी के सामने कबूल किया है कि उसने फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर और असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट की भर्ती में भारी वसूली की थी। उसने अभ्यर्थियों से पद के हिसाब से 20 से 35 लाख रुपये तक का सौदा किया और अकेले इसी परीक्षा से साढ़े पांच करोड़ रुपये वसूले।

​इसके अलावा वह सरकारी दफ्तरों में गाड़ियां किराये पर देने का धंधा भी चलाता था और जमीन की बड़ी खरीदारी में शामिल था। सीआईडी को जांच में यह भी पता चला है कि JSSC JE पेपर लीक में मुंबई से पकड़े गए अरुण शर्मा के तार भी इसी गिरोह से जुड़े हुए हैं। एजेंसी अब पूरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में जुटी है।

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