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Kailash Gehlot : AAP छोड़ BJP को अपनाने पर बोले कैलाश गहलोत- ED-CBI के दबाव में नहीं बदला पाला

बीजेपी में शामिल होने के बाद कैलाश गहलोत ने कहा कि आम आदमी पार्टी छोड़ने का फैसला उन्होंने काफी सोच-विचार के बाद किया। जो लोग कह रहे हैं कि किसी दबाव में आकर आम आदमी पार्टी छोड़ी, वह पूरी तरह से गलत हैं। मैंने कभी किसी के दबाव में आकर कोई कदम नहीं उठाया है।

by Rakesh Pandey
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नई दिल्ली: नजफगढ़ से विधायक और आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता रहे कैलाश गहलोत ने आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया। उन्होंने बीजेपी मुख्यालय में औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष दुष्यंत गौतम और दिल्ली भाजपा के नेता हर्ष मल्होत्रा भी मौजूद थे।

कहा-आसान नहीं था आम आदमी पार्टी छोड़ने का फैसला

बीजेपी में शामिल होने के बाद कैलाश गहलोत ने कहा कि आम आदमी पार्टी छोड़ने का फैसला उनके लिए बिल्कुल भी आसान नहीं था। यह फैसला मैंने एक रात में नहीं लिया बल्कि इसके लिए काफी सोच-विचार किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने यह कहना शुरू किया है कि वह किसी दबाव में आकर पार्टी छोड़ रहे हैं, वह पूरी तरह से गलत हैं। मैंने कभी किसी के दबाव में आकर कोई कदम नहीं उठाया। 2015 से लेकर अब तक, मेरी राजनीति में कोई भी फैसला दबाव के बजाय मेरी खुद की इच्छा पर आधारित रहा है ।

गलत नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रहे लोग: गहलोत

कैलाश गहलोत ने यह भी कहा कि कुछ लोग यह नैरेटिव बना रहे हैं कि उन्होंने ईडी या सीबीआई के दबाव में आकर आम आदमी पार्टी छोड़ी, जो कि पूरी तरह से निराधार है। उन्होंने अपनी पार्टी छोड़ने के कारणों की व्याख्या की, “मैं पेशे से वकील हूं और वकालत छोड़कर आम आदमी पार्टी से जुड़ा था क्योंकि मुझे उस समय एक ऐसे नेता में उम्मीद दिखाई दी थी, जो दिल्ली के लोगों के लिए कुछ करना चाहता था।”

अरविंद केजरीवाल को चिट्ठी में लिखा था इस्तीफा

कैलाश गहलोत ने इससे पहले आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को एक चिट्ठी लिखकर अपनी पार्टी छोड़ने की वजह भी स्पष्ट की थी। उन्होंने चिट्ठी में लिखा कि “नया बंगला” जैसे विवादों ने आम आदमी पार्टी की साख पर सवाल खड़ा किया है। गहलोत ने लिखा था, “अब यह साफ हो गया है कि दिल्ली सरकार अपना अधिकांश समय केंद्र से लड़ने में बिताती है, जबकि दिल्ली के लिए असल में कोई प्रगति नहीं हो रही। अब मुझे यह महसूस हुआ कि मुझे इस पार्टी में रहकर काम नहीं कर सकता और इसलिए मैंने आम आदमी पार्टी से इस्तीफा देने का फैसला किया।”

गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी अब सिर्फ अपनी राजनीतिक रणनीतियों के तहत काम कर रही है, और लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने के बजाय अपनी राजनीति में व्यस्त है।

दोहराई प्रतिबद्धता- जारी रहेगी दिल्लीवासियों की सेवा

बीजेपी में शामिल होने के बाद गहलोत ने कहा, “मैंने अपनी राजनीतिक यात्रा दिल्ली के लोगों की सेवा करने की प्रतिबद्धता के साथ शुरू की थी और मैं वही काम आगे भी करना चाहता हूं।” उन्होंने बीजेपी में शामिल होने का फैसला करते हुए यह भी कहा कि बीजेपी ने उन्हें एक ऐसा मंच दिया है, जहां वे दिल्ली और देश की सेवा में अपना योगदान दे सकते हैं। गहलोत ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद इस बात पर जोर दिया कि वह बीजेपी के नेतृत्व में काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और उन्हें विश्वास है कि बीजेपी दिल्ली और देश की समस्याओं का सही समाधान प्रदान कर सकती है।

फरवरी में होंगे विधानसभा चुनाव, गहलोत का इस्तीफा डाल सकता है प्रभाव

गहलोत ने रविवार को दिल्ली सरकार से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया था। वह गृह, प्रशासनिक सुधार, महिला एवं बाल विकास और आईटी विभागों के प्रभारी थे। उनका यह कदम दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले उठाया गया है, जो फरवरी 2024 में होने वाले हैं। उनका इस्तीफा और बीजेपी में शामिल होना आगामी चुनावी घटनाक्रम में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

गहलोत की आम आदमी पार्टी से विदाई और बीजेपी में उनका आना दिल्ली के राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में एक बड़ा बदलाव है। यह कदम बीजेपी के लिए एक राजनीतिक लाभ के तौर पर देखा जा सकता है, वहीं आम आदमी पार्टी के लिए एक और चुनौती है। अब यह देखना होगा कि उनका यह कदम दिल्ली में बीजेपी के लिए कितना फायदेमंद साबित होगा।

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