
नई दिल्ली/ जमशेदपुर : भारतीय कॉरपोरेट जगत में एन चंद्रशेखरन का नाम उन चुनिंदा शीर्ष अधिकारियों में लिया जाता है, जिन्होंने बेहद सामान्य स्तर से शुरुआत कर देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक के शीर्ष पद तक का सफर तय किया। करीब चार दशक तक टाटा समूह से जुड़े रहने वाले चंद्रशेखरन ने अब टाटा संस के चेयरमैन पद पर अपने मौजूदा कार्यकाल के बाद आगे नहीं बने रहने का फैसला किया है। उनका कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को पूरा होगा।
चंद्रशेखरन ने टाटा संस के बोर्ड को अपने फैसले की जानकारी देते हुए कहा है कि टाटा समूह में उनका करीब 40 साल का पेशेवर सफर पूरा हो चुका है। उन्होंने बोर्ड से अपने उत्तराधिकारी का फैसला जल्द करने का आग्रह किया है, ताकि नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से पूरी की जा सके।
1987 में प्रशिक्षु के तौर पर शुरू किया करियर
एन चंद्रशेखरन का जन्म 1963 में तमिलनाडु के मोहनूर गांव में हुआ था। उनकी शुरुआती जिंदगी सामान्य पृष्ठभूमि में बीती। उन्होंने त्रिची के क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।
शिक्षा पूरी करने के बाद वर्ष 1987 में उन्होंने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज में सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर प्रशिक्षु के रूप में अपना करियर शुरू किया। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि एक प्रशिक्षु के रूप में टाटा समूह में कदम रखने वाला यह युवा आगे चलकर पूरे समूह के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचेगा।
उनकी कार्यक्षमता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें तत्कालीन टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के वरिष्ठ अधिकारी एस. रामदोराई के कार्यकारी सहायक के तौर पर काम करने का अवसर मिला। इस भूमिका ने उन्हें बड़े कारोबारी फैसलों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका दिया।
46 साल की उम्र में बने टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी
लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ते हुए चंद्रशेखरन वर्ष 2009 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बने। उस समय उनकी उम्र महज 46 वर्ष थी। वह कंपनी के इतिहास में सबसे कम उम्र में इस पद पर पहुंचने वाले अधिकारियों में शामिल थे।
उनके नेतृत्व में टीसीएस ने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की। कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ा और वह भारत की सबसे मूल्यवान सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में शामिल हुई। चंद्रशेखरन का नेतृत्व केवल कारोबारी विस्तार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कंपनी को बदलते वैश्विक बाजार के अनुरूप तैयार करने पर भी जोर दिया।
रतन टाटा ने संकट के दौर में जताया भरोसा
वर्ष 2016-17 में साइरस मिस्त्री को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटाए जाने के बाद टाटा समूह में बड़ा नेतृत्व संकट पैदा हुआ था। समूह के सामने ऐसे व्यक्ति को जिम्मेदारी देने की चुनौती थी, जो संगठन के भीतर की कार्यप्रणाली को समझता हो और विभिन्न कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सके।
इसी दौर में तत्कालीन चेयरमैन रतन टाटा ने एन चंद्रशेखरन पर भरोसा जताया। वर्ष 2017 में चंद्रशेखरन ने टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला। इसके साथ ही एक सॉफ्टवेयर प्रोग्रामर प्रशिक्षु से शुरू हुआ उनका सफर देश के सबसे प्रतिष्ठित कारोबारी समूह के शीर्ष पद तक पहुंच गया।
टाटा संस के चेयरमैन के रूप में कई बड़े फैसले
चेयरमैन के तौर पर चंद्रशेखरन के कार्यकाल में टाटा समूह ने कई महत्वपूर्ण कारोबारी क्षेत्रों में विस्तार किया। टाटा समूह ने एयर इंडिया का अधिग्रहण किया, जिसे समूह के विमानन कारोबार में महत्वपूर्ण वापसी के तौर पर देखा गया। इसके अलावा डिजिटल कारोबार के विस्तार के लिए टाटा न्यू मंच की शुरुआत की गई।
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में समूह ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन, हरित ऊर्जा और नई तकनीकों जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर भी ध्यान बढ़ाया। इन क्षेत्रों में निवेश और विस्तार को टाटा समूह की दीर्घकालिक कारोबारी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया।
पांच साल के कार्यकाल के विस्तार पर नहीं बनी सहमति
चंद्रशेखरन के बयान के मुताबिक, सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट की ओर से उनके अगले पांच साल के कार्यकाल के विस्तार की सिफारिश की गई थी। इस प्रस्ताव को टाटा संस की नामांकन और पारिश्रमिक समिति तथा बोर्ड के समक्ष भी रखा गया था।
यह प्रस्ताव 24 फरवरी 2026 को टाटा संस के बोर्ड की बैठक में आया था। हालांकि, बोर्ड के एक सदस्य की ओर से इसका समर्थन नहीं किया गया। सर्वसम्मति नहीं बनने के कारण चंद्रशेखरन ने उस समय इस मामले को आगे बढ़ाने के बजाय निर्णय टालने का विकल्प चुना।
उनके मुताबिक, इस प्रस्ताव को छह महीने बीत जाने के बावजूद स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। उनका कहना है कि टाटा संस के आकार और उसके सामने मौजूद महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजनाओं को देखते हुए नेतृत्व को लेकर स्पष्टता कर्मचारियों, निवेशकों और कारोबारी साझेदारों के हित में जरूरी है।
फरवरी 2027 में पूरा होगा कार्यकाल
इन्हीं परिस्थितियों के बीच एन चंद्रशेखरन ने टाटा संस के बोर्ड को सूचित किया है कि वह 20 फरवरी 2027 को मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम आगे नहीं रखेंगे। उन्होंने बोर्ड से नए चेयरमैन के चयन की प्रक्रिया जल्द शुरू करने का आग्रह किया है।
इसका उद्देश्य नेतृत्व परिवर्तन के दौरान टाटा संस के कामकाज में किसी तरह की बाधा नहीं आने देना है। अब टाटा समूह के सामने सबसे बड़ी चुनौती चंद्रशेखरन के उत्तराधिकारी का चयन करना होगी।
चार दशक के सफर के बाद अब नए नेतृत्व की तैयारी
एन चंद्रशेखरन का टाटा समूह के साथ सफर करीब चार दशक लंबा रहा है। वर्ष 1987 में प्रशिक्षु के तौर पर शुरुआत करने वाले चंद्रशेखरन ने टीसीएस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी से लेकर टाटा संस के चेयरमैन तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
रतन टाटा के भरोसे से टाटा संस के शीर्ष पद तक पहुंचे चंद्रशेखरन के कार्यकाल में समूह ने पारंपरिक कारोबार के साथ नई तकनीक और भविष्य के क्षेत्रों पर भी अपना ध्यान बढ़ाया। अब उनके उत्तराधिकारी का चयन टाटा समूह के अगले दौर की रणनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

