
चाईबासा : महिला कॉलेज के संस्कृत विभाग में विश्व संस्कृत सप्ताह का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें प्रथम वर्ष की नव नामांकित छात्राओं का तिलक चंदन के साथ स्वागत तथा नया सिलेबस देकर सम्मानित किया गया। साथ ही विभिन्न प्रकार के संस्कृत के कार्यक्रमों का मंचन किया गया।
संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अंजना प्रेमा वंदना खलखो, रांची कॉलेज की सहायक संस्कृत प्राध्यापिका मनीषा बोदरा, संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. निवारण महथा तथा सभी विभागों के विभागाध्यक्षों ने संस्कृत मंत्रोंच्चारण के साथ माता सरस्वती पर पुष्पार्चन कर किया गया।
संस्कृत विश्व की सभी भाषाओं की जननी : डॉ. निवारण महथा
विश्व संस्कृत सप्ताह कार्यक्रम का परिचय कराते हुए संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. निवारण महथा ने कहा कि विश्व संस्कृत सप्ताह मानव संसाधन विकास मंत्रालय के द्वारा 1969 ई. से मनाया जाता आ रहा है। यह कार्यक्रम रक्षाबंधन से प्रारंभ होकर विश्व संस्कृत सप्ताह के रूप में एक सप्ताह तक मनाया जाता है, क्योंकि पूरे विश्व में प्राचीन काल से वेदों और संस्कृत की पढ़ाई इसी दिन से प्रारंभ की जाती थी। आज ही के दिन वेद अध्ययन करने वाले विद्यार्थी गुरुकुल में प्रवेश पाते हैं। संस्कृत की महता को बताते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा भारत की सबसे प्राचीन भाषा है। सभी भाषाओं की उत्पत्ति संस्कृत से ही हुई है। यह सभी भाषाओं की जननी है। वेद, पुराण, रामायण, महाभारत, गीता, उपनिषद आदि सभी धार्मिक ग्रंथो की रचना संस्कृत में ही हुई है। आज के समय में सबसे कम बोली जाने वाली भाषा संस्कृत है, लेकिन इसकी महत्ता को विश्व के सभी लोग जानते हैं। आज के समय में कंप्यूटर विज्ञान के लिए संस्कृत सबसे उपयुक्त भाषा के रूप मे स्वीकार की गई है। वर्तमान समय में संस्कृत एक ऐसी विषय है जिसको पढ़कर शत-प्रतिशत छात्रों को नौकरी मिलती है। आज विश्व के सभी देश संस्कृत को अपनाकर अपने छात्रों को संस्कृत पढाने का काम कर रहे हैं।
महिला कॉलेज की प्राचार्या डॉ. अंजना प्रेम वन्दना खलखो ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत सप्ताह संस्कृत के महत्व को दर्शाता है। इसलिए सभी छात्रों को संस्कृत के प्रति समर्पण भाव रखते हुए संस्कृत की पढ़ाई करनी चाहिए, क्योंकि गीता महाभारत वेद पुराण सभी संस्कृत में ही लिखे गए हैं। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय की संस्कृत प्राध्यापिका मनीषा बोदरा ने संस्कृत के वर्तमान समय में उपयोगिता पर प्रकाश डाला और संस्कृत के बच्चों को आगे संस्कृत पढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में हिंदी विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. सुचिता बारा, इतिहास विभाग की प्राध्यापिका डॉ. अंजना सिंह ने भी छात्रों के बीच संस्कृत की महत्ता को बताया और नव नामांकित छात्रों को आगे का दिशा निर्देश दिया।
ये रहे शामिल
कार्यक्रम में रसायन विज्ञान के वरीय प्राध्यापक डॉ. विकास मिश्रा, राजनीति शास्त्र की प्राध्यापिका डॉ. रूबी कुमारी, गृह विज्ञान की प्राध्यापिका डॉ. मीरा कुमारी, बीएड विभाग से मुबारक करीम हाशमी तथा सितेंद्र रंजन सिंह आदि सभी प्राध्यापक प्राध्यापिकाओं ने भाग लिया।
कार्यक्रम का संचालन सप्तम समसत्र की छात्रा रीमा बारिक ने किया जिसमें मंत्रोच्चारण, श्लोक वचन, कथा वाचन संस्कृत के महत्व पर भाषण, एकल गीत, समूह गीत, संस्कृत नाटक आदि कार्यक्रम विशेष रूप से प्रस्तुत किए गये।
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