
हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली : भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रहा है। पहले इसे अमीरों की बीमारी कहा जाता था लेकिन अब यह बीमारी सामान्य हो चुकी है। अमीर से गरीब और बड़े से बच्चे सभी इस बीमारी के चपेट में आ गए हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि अब बच्चों में भी यह बीमारी तेजी से बढ़ रही है। इंटरनेशनल
डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार, भारत में वर्ष 2019 तक डायबिटीज के करीब 7.7 करोड़ मरीज थे जो 2030 तक बढ़कर 10 करोड़ हो जाएगा। सबसे चिंता का विषय यह है कि इसका पता लोगों को सही समय पर नहीं चल पाता है। इसलिए इस बीमारी को साइलेंट किलर भी कहा जाता है।
दरअसल, डायबिटीज का लक्षण
शुरुआती दौर में पकड़ में नहीं आती है। जब बीमारी काफी बढ़ जाती है तो इसके लक्षण सामने आते हैं। तब तक शरीर को काफी नुकसान पहुंचा दिया होता है।
तीन नाम से जाना जाता है डायबिटीज
डायबिटीज को लोग तीन नाम से जानते हैं। कोई इसे डायबिटीज कहता है तो कोई मधुमेह व शुगर कहता है। ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों में इस बीमारी के नाम को लेकर संशय अधिक देखा जाता है। हालांकि, पहले की अपेक्षा लोगों में जागरूकता काफी बढ़ी है। जिसके कारण मरीजों की पहचान भी समय पर हो रही है। यह बीमारी शरीर को खोखला बना देता है। शरीर में शुगर का ज्यादा व कम होना दोनों ही खतरनाक है।
डायबिटीज क्या है?
आपके मन में सवाल चलता होगा कि आखिर डायबिटीज क्या है? महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कालेज अस्पताल के फिजिशियन डा. बलराम झा ने बताया कि जब हमारे शरीर के पैंक्रियाज में इंसुलिन की कमी हो जाती है यानी कम मात्रा में इंसुलिन पहुंचता है तो खून में ग्लूकोज की मात्रा भी ज्यादा हो जाती है,
जिसे डायबिटीज, मधुमेह या फिर शुगर कहा जाता है।
डायबिटीज होने का कारण
महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) मेडिकल कालेज अस्पताल के फिजिशियन डा. बलराम झा ने बताया कि डायबिटीज होने का दो मुख्य कारण है। पहला जेनेटिक, जो उनके माता-पिता या फिर परिवार के अन्य सदस्यों को होता है। यह बीमारी पीढ़ी दर पीढ़ी होते चला जाता है। इसलिए कहा जाता है कि उम्र 35 के बाद नियनमित रूप से जांच करानी चाहिए। वहीं, दूसरा कारण आज का जीवनशैली।
जिस तरह से लोगों का जीवन हो गया है उसमें यह बीमारी बढ़ना लाजिमी है। खान-पान से लेकर लोगों का दिनचर्या पूरी तरह से बदल गई है। इसे ठीक करना अति-आवश्यक है। अन्यथा यह बीमारी पूरे जीवन को बर्बाद कर सकता है।
दो तरह की होती है डायबिटीज
आपको बता दें कि डायबिटीज दो तरह की होती है। इसमें टाइप-1 और टाइप-2 शामिल हैं। टाइप-1 डायबिटीज आनुवांशिक (जेनेटिक) होता है। जबकि टाइप-2
डायबिटीज गलत लाइफस्टाइल और खान-पान के कारण तेजी से बढ़ रही है।
इन अंगों पर डायबिटीज का पड़ता गहरा असर
– आंखों के आकार और नजर में बदलाव आता है।
– त्वचा पर चकत्ते होने लगते हैं, जिसे डायबिटिक डर्माड्रोम कहते हैं।
– डायबिटीज के टाइप-1 मरीजों में उल्टी, पेट दर्द, घबराहट, गहरी सांस और बेहोशी जैसी समस्याएं होती है।
– नसों को भी नुकसान पहुंचता है, जिस कारण से पैरों में झनझनाहट होती है।
– ब्लाइंडनेस का जोखिम बढ़ जाता है, जिसे डायबिटीज रेटिनोपैथी कहते हैं।
डायबिटीज का लक्षण क्या है
अधिक पेशाब आना
अधिक भूख लगना
अधिक प्यास लगना
वजन कम होना
बेहोशी आना
दौरा पड़ना

