
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिला उपभोक्ता आयोग ने बाइक दुर्घटना के बीमा दावे को खारिज करने के मामले में बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को कुल 47,360 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
क्या है मामला
यह मामला सी.सी. केस संख्या 29/2025 से जुड़ा है। इसकी संस्थापन तिथि 18 जुलाई 2025 है, अंतिम सुनवाई 22 अगस्त 2026 को हुई और फैसले की घोषणा 2 सितंबर 2026 को की गई।
शिकायतकर्ता मनोज कुमार यादव, पिता कालीपद यादव, निवासी बांदा कुंडियाधार, हाटगम्हरिया, पश्चिमी सिंहभूम ने अपनी रॉयल एनफील्ड बाइक का बीमा बजाज एलियांज से कराया था। पॉलिसी 9 सितंबर 2024 से 8 सितंबर 2025 तक वैध थी।
पहला पक्ष एस.पी. वेंचर्स, रॉयल एनफील्ड अधिकृत डीलर, मतकामहातु, चाईबासा
दूसरा पक्ष – बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, रांची
शिकायतकर्ता के अनुसार दुर्घटना में बाइक क्षतिग्रस्त होने के बाद उसने डीलर एस.पी. वेंचर्स से संपर्क किया। डीलर ने मरम्मत का एस्टीमेट बनाया, लेकिन बीमा कंपनी ने मंजूरी नहीं दी।
कंपनी का तर्क 34 दिन लेट दी सूचना
बीमा कंपनी ने आयोग में कहा कि दुर्घटना 26 फरवरी 2025 को हुई थी, लेकिन सूचना 1 अप्रैल 2025 को दी गई, यानी 34 दिन की देरी। कंपनी ने 18 अप्रैल, 29 अप्रैल और 9 मई को पत्र भेजकर ड्राइविंग लाइसेंस और अन्य दस्तावेज मांगे, लेकिन दस्तावेज नहीं मिलने पर 20 मई 2025 को दावा खारिज कर दिया। कंपनी ने यह भी कहा कि दावे में कुछ पुरानी क्षतियों को भी जोड़ा गया था। सर्वेयर ने क्षति का आकलन 32,360 रुपये किया था।
रिकॉर्ड में विरोधाभास पकड़ा गया
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता के शपथपत्र में दुर्घटना की तारीख 24 दिसंबर 2024 लिखी है, जबकि कंपनी के रिकॉर्ड में 26 फरवरी 2025 दर्ज है। ड्राइविंग लाइसेंस और सर्वे रिपोर्ट की तारीख को लेकर भी रिकॉर्ड में विसंगति मिली।
आयोग का फैसला
आयोग ने रॉयल एनफील्ड डीलर एस.पी. वेंचर्स के खिलाफ सेवा में कमी नहीं पाते हुए शिकायत खारिज कर दी। आयोग ने कहा कि केवल बीमा कंपनी द्वारा अप्रूवल नहीं देने से डीलर को मुफ्त मरम्मत के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
वहीं बजाज एलियांज के खिलाफ सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार किया और आदेश दिया कि 32,360 रुपये बीमा दावा राशि,10,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना के लिए और 5,000 रुपये मुकदमा खर्च का कुल राशि का भुगतान आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर करना होगा। यदि तय समय में भुगतान नहीं हुआ तो 32,360 रुपये पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

