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Maoist Activities: पश्चिमी सिंहभूम में सुरक्षा बलों की सख्ती के बाद इनामी नक्सली सचिन की दलमा क्षेत्र में बढ़ी सक्रिययता, आत्मसमर्पण की अपील

पश्चिमी सिंहभूम में सुरक्षा बलों की लगातार सख्ती बाद बोड़ाम और दलमा के जंगली इलाकों में नक्सलियों की हलचल बढ़ गई है। इनामी नक्सली सचिन भी दलमा के आसपास सक्रिय है।

by Kanchan Kumar
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​जमशेदपुर / बोड़ाम : पश्चिमी सिंहभूम में सुरक्षा बलों की लगातार सख्ती बाद अब पूर्वी सिंहभूम के बोड़ाम और दलमा के जंगली इलाकों में नक्सलियों की हलचल बढ़ गई है। खुफिया विभाग से जानकारी मिली है कि सरकार द्वारा घोषित इनामी नक्सली रामप्रसाद मार्डी उर्फ सचिन इस समय दलमा के आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय है। इस खबर के आते ही सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह चौकस हो गई हैं। जिला पुलिस को निर्देश दिया गया है कि वह प्रभावित इलाकों में गश्त बढ़ाए और खास निगरानी रखे।

​नक्सलियों से हथियार छोड़ने की मांग

शुक्रवार को दलमा आंचलिक सुरक्षा समिति के केंद्रीय महासचिव रामकृष्ण महतो ने जंगलों में भटक रहे नक्सलियों से एक खास अपील की है। बोड़ाम के रहने वाले महतो ने कहा कि हिंसा का रास्ता किसी भी समस्या का हल नहीं है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति बहुत ही शानदार है। जो लोग बरसों से भटक कर समाज से कट चुके हैं, वे इस नीति का फायदा उठाकर अपने परिवार के पास वापस लौट सकते हैं और एक इज्जतदार जिंदगी शुरू कर सकते हैं।

शकुंतला उर्फ वर्षा ने चुना सही रास्ता

​रामकृष्ण महतो ने हाल ही में सरेंडर करने वाली महिला नक्सली शकुंतला महतो उर्फ वर्षा उर्फ पुष्पा के फैसले की तारीफ की। उन्होंने बताया कि वर्षा ने एक लंबा समय जंगलों में काटने के बाद आखिरकार सही रास्ता चुन ही लिया। वह बेहद गरीब परिवार की लड़की थी। जब वह सिर्फ 11 साल की थी, तब उसके चाचा अर्जुन महतो ने उसे बहला-फुसलाकर गिरिडीह के कुख्यात नक्सली अतुल महतो के दस्ते में शामिल करवा दिया था। वर्षा ने करीब 25 साल बंदूक के साये में गुजारे, जिससे उसका पूरा जीवन बर्बाद हो गया।

नक्सलवाद एक दलदल

​महतो ने साल 2004 का एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब वे दलमा इलाके के दौरे पर थे, तब वर्षा ने उनसे खुद कहा था कि नक्सलवाद एक ऐसा दलदल है, जिसमें लोग आ तो आसानी से जाते हैं, लेकिन यहां से बाहर निकलना नामुमकिन सा हो जाता है। वर्षा संगठन के तौर-तरीकों से खुश नहीं थी, लेकिन मजबूरी के चलते वह इतने सालों तक चाहकर भी वहां से नहीं निकल पाई। वर्षा के चाचा अर्जुन महतो पर भी कई केस दर्ज थे और करीब दस साल पहले घाटशिला के पास पुलिस मुठभेड़ में वह मारा गया था।

​रामकृष्ण महतो ने कहा कि वर्षा का आत्मसमर्पण बाकी बचे नक्सलियों के लिए एक बड़ी सीख है। उन्होंने रामप्रसाद मार्डी (सचिन), मीता, सागर और रवि जैसे सक्रिय नक्सलियों से सीधे अपील की कि वे भी अपनी बंदूकें छोड़ दें। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपनों के बीच रहकर सम्मान से जीना ही असल जिंदगी है, हिंसा में कोई भविष्य नहीं है।

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