बेंगलुरु: कर्नाटक विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 18 विधायकों को शुक्रवार को छह महीने के लिए निलंबित कर दिया गया। इन विधायकों पर विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी का अनादर करने और अभद्र व्यवहार करने का आरोप था। इस घटना के बाद सत्ता पक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के इस फैसले का समर्थन किया है।
विधानसभा अध्यक्ष यू टी खादर ने इन 18 विधायकों के निलंबन की घोषणा की। इन विधायकों ने विधानसभा के दौरान हनीट्रैप के आरोपों की न्यायिक या सीबीआई जांच की मांग करते हुए अध्यक्ष के पोडियम पर चढ़कर कागज फेंके थे। इसके बाद सदन की कार्यवाही में भारी हंगामा हुआ, जिससे विधानसभा की कार्यवाही प्रभावित हुई। इस पर सत्ता पक्ष ने विधायकगण के इस व्यवहार को असंवैधानिक और अभद्र बताते हुए उन्हें छह महीने के लिए निलंबित करने की मांग की, जिसे विधानसभा ने मंजूरी दी।
विधानसभा अध्यक्ष ने इस दौरान कहा, “आज की घटना से मुझे बहुत दुख पहुंचा है। सदन और अध्यक्ष की कुर्सी लोकतंत्र के प्रतीक हैं। कुछ विधायकों ने इसकी पवित्रता को नष्ट किया है। इस तरह के कृत्य को बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।”
कर्नाटक सरकार में कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल ने बीजेपी विधायकों के इस व्यवहार को असभ्य बताते हुए कहा कि उनका यह कृत्य लोकतंत्र और संसदीय कार्य प्रणाली के लिए बेहद अनुचित था। उन्होंने कहा कि ऐसी घटना लोकतंत्र की मर्यादा को तोड़ती है और इससे किसी भी सदन की कार्यवाही में अव्यवस्था पैदा होती है।
निलंबित विधायकों में प्रमुख रूप से डोड्डानगौड़ा पाटिल, सीएन अश्वथनारायण, बी सुरेश गौड़ा, उमानाथ कोट्यान, सीके राममूर्ति, धीरज मुनिराजू, मुनिरत्न, एसआर विश्वनाथ, डॉ भरत शेट्टी, डॉ चंद्रू लमानी, बसवराज मत्तीमुडु, शैलेन्द्र बेलडेल सहित अन्य शामिल हैं।
निलंबन के बाद इन विधायकों ने विधानसभा से बाहर जाने से इंकार कर दिया, जिसके बाद मार्शल्स को उन्हें बाहर निकालने के लिए बुलाया गया। इसके बाद सदन में इन विधायकों के निलंबन से संबंधित विधेयक पारित किया गया, जिसे एच.के. पाटिल ने पेश किया था।
इस पूरे मामले ने कर्नाटक विधानसभा में हंगामा मचाया, जिससे राज्य की राजनीति में तूल पकड़ा। बीजेपी विधायक इस फैसले को लेकर विरोध जता सकते हैं, लेकिन विधानसभा ने इसे लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया है।

