नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम (Supreme Court Collegium) ने हाईकोर्ट के 9 जजों के तबादले की सिफारिश की है। इसमें मोदी सरनेम मामले में कांग्रेस नेता व सांसद राहुल गांधी के खिलाफ निचली कोर्ट के फैसले को बहाल रखने वाले गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) के न्यायमूर्ति हेमंत एम प्रच्छक (Hemant M Prachchhak) का नाम भी शामिल है। उनका ट्रांसफर पटना हाईकोर्ट में करने की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली कॉलेजियम ने केंद्र सरकार से की है। हालांकि अभी तक उनके ट्रांसफर की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। अगर ट्रांसफर सूची पर नजर डालें तो सबसे इसमें गुजरात व पंजाब के चार – चार जजों का नाम शामिल है जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज का नाम शामिल किया गया है।
इस वजह से चर्चा में रहे जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक:
मोदी सरनेम से जुड़े मानहानि मामले में राहुल गांधी को जब निचली अदालत ने दो साल की सजा सुनायी थी तो उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट में याचिका दायर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई करते हुए जज हेमंत एम. प्रच्छक की बेंच ने राहुल गांधी की अपील को खारिज करते हुए सजा बरकरार रखा था। इसके बाद जज हेमंत एम. प्रच्छक चर्चा में आए थे।
जानिए क्या है राहुल गांधी को सजा देने से संबंधित मामला:
राहुल गांधी ने कर्नाटक के कोलार में 13 अप्रैल 2019 को चुनावी रैली में कहा था, ”नीरव मोदी, ललित मोदी, नरेंद्र मोदी का सरनेम कॉमन क्यों है? सभी चोरों का सरनेम मोदी क्यों होता है इसके बाद भाजपा के नेता ने उनके खिलाफ मानहानि केस दायर किया था। इसपर सुरत की कोर्ट ने राहुल गांधी को दोषी मानते हुए दो साल की सजा सुनायी थी। उन्होंने इस मामले को पहले सूरत की सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन सेशन कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली थी। उसके बाद राहुल गांधी हाई कोर्ट का रुख किया था। गुजरात हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हेमंत एम प्रच्छक की बेंच ने 66 दिन के बाद फैसला सुनाया था। इस दौरान कोर्ट ने कहा था कि राहुल गांधी को दोषी ठहराने का ट्रायल कोर्ट का फैसला सही है। जस्टिस हेमंत प्रेक्षक की बेंच ने कहा था-निचली अदालत के फैसले में हस्तक्षेप करने की कोई जरूरत नहीं हैं। इसलिए राहुल गांधी का आवेदन खारिज किया जाता है। इसके बाद राहुल गांधी इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट गए थे जहां उन्हें राहत मिल गयी थी और देश के सबसे बड़े अदालत ने उनकी सजा पर रोक लगा दी थी।
इन जजों के ट्रांसफर की हुई है सिफारिश:
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जज हेमंत एम. प्रच्छक के साथ ही हाईकोर्ट के कुल 9 जजों के ट्रांसफर की सिफारिश की है। जिसमें गुजरात हाईकोर्ट के ही जज समीर दवे को राजस्थान, जस्टिस कुमारी गीता गोपी को मद्रास और जस्टिस अल्पेश वाई कोग्जे को इलाहाबाद हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की सिफारिश की गयी है। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के भी चार जजों के ट्रांसफर की सिफारिश की गई है। वहां से जस्टिस अरविन्द सिंह सांगवान को इलाहाबाद, जस्टिस अवनीश झिंगन को गुजरात, जस्टिस राज मोहन सिंह को मध्य प्रदेश और जस्टिस अरुण मोंगा को राजस्थान हाईकोर्ट में ट्रांसफर करने की सिफारिश की गई है। जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक कुमार सिंह को मद्रास हाईकोर्ट भेजने की सिफारिश कॉलेजियम ने की है
जानिए क्या है हाईकोर्ट के जजों के संस्थानांतरण की प्रक्रिया:
संविधान का अनुच्छेद 222 मुख्य न्यायाधीश सहित एक न्यायाधीश के एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण का प्रावधान करता है। प्रक्रिया ज्ञापन (एमओपी), जो संवैधानिक न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्तियों और पोस्टिंग का मार्गदर्शन करता है। एमओपी में प्रावधान है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश से स्थानांतरण की सिफारिश प्राप्त होने के बाद, केंद्रीय कानून मंत्री संबंधित कागजात के साथ प्रधान मंत्री को सिफारिश सौंपते हैं, जो फिर संबंधित न्यायाधीश के स्थानांतरण पर राष्ट्रपति को सलाह देते हैं। राष्ट्रपति के मंजूरी के बाद संस्थनांतरण की प्रक्रिया पूरी होती है और अधिसूचना जारी की जाती है।

