संभल : उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हाल ही में हुई हिंसा ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़े खतरे की ओर इशारा किया है। हिंसा स्थल से बरामद हुए कारतूसों पर ‘POF’ (पाकिस्तानी आर्डिनेंस फैक्ट्री) का निशान होने से यह मामला और भी गंभीर हो गया है। इन कारतूसों के मिलने से यह संभावना जताई जा रही है कि इस हिंसा में पाकिस्तान से जुड़े तत्वों का हाथ हो सकता है। अब इस मामले की जांच एनआईए (राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण) द्वारा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
संभल हिंसा और बरामद पाकिस्तानी कारतूस
संभल में हुई हिंसा के बाद पुलिस ने घटनास्थल से पाकिस्तानी आर्डिनेंस फैक्ट्री (POF) के कारतूस बरामद किए हैं, जो यह साबित करते हैं कि इस हिंसा में विदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया गया था। पुलिस सूत्रों के अनुसार, ये कारतूस खासतौर पर पुलिस पर फायर किए गए थे। इसके अलावा, मौके से विदेशी हथियारों के खोखे भी मिले, जिनपर ‘मेड इन यूएसए’ का निशान था। अब पुलिस जांच कर रही है कि क्या दंगाइयों ने इन विदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया था! आखिर ये यह हथियार कहां से आए।
संभल में हिंसा के दौरान पुलिस पर कई राउंड फायरिंग की गई थी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि इन हथियारों और कारतूसों का स्रोत क्या था? पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि इन विदेशी हथियारों और कारतूसों को उत्तर प्रदेश तक कैसे पहुंचाया गया।
पुलिस का सर्च ऑपरेशन और बरामदगी
संभल हिंसा के दस दिन बाद भी पुलिस सर्च ऑपरेशन चला रही है। इस ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने कुछ बुलेट शेल्स भी बरामद किए हैं। ये शेल्स मस्जिद के सामने स्थित एक सड़क किनारे से नाली में पाए गए। इन बुलेट शेल्स के मिलने से यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या दंगाइयों ने इन्हें जानबूझकर नालियों में छिपाया था, ताकि सबूत मिटाए जा सकें, या फिर ये शेल्स हिंसा के दौरान गलती से नाली में गिर गए थे। पुलिस इस मामले में हर पहलू पर जांच कर रही है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
संभल मामले में चल रही न्यायिक जांच
संभल हिंसा के मामले में फिलहाल एक न्यायिक जांच चल रही है, जिसके लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया गया है। इस जांच में मजिस्ट्रेट के सामने 10 पुलिस कर्मियों के बयान दर्ज किए गए हैं, जिनमें से सीओ (सर्कल ऑफिसर) भी शामिल हैं। राज्यपाल द्वारा गठित इस न्यायिक जांच टीम की कार्यवाही में पूर्व आईपीएस अधिकारी, पूर्व आईएस अधिकारी और इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज के रूप में एक अध्यक्ष शामिल हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार ने भी एक जुडिशल कमीशन का गठन किया है, जो इस मामले की गहरी जांच करेगा।
संदेह और जांच की गहराई
इस मामले में अब कई सवाल उठ रहे हैं। क्या इस हिंसा में विदेशी तत्वों का हाथ था। क्या पाकिस्तान से कुछ तत्व या संगठन इस हिंसा को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश में सक्रिय थे। इस तरह के सवालों के चलते इस मामले में जांच और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यदि इस हिंसा में पाकिस्तान का कनेक्शन साबित होता है, तो यह न केवल राज्य की सुरक्षा बल्कि पूरे देश के लिए गंभीर खतरे का संकेत हो सकता है।
निष्कर्ष : एक बड़ी जांच की जरूरत
संभल हिंसा और उसमें पाकिस्तान से जुड़े हथियारों के बरामद होने के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को एक बड़ी जांच की जरूरत है। एनआईए द्वारा इस मामले की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि हिंसा के पीछे कौन से तत्व थे और उनका मकसद क्या था। इसके साथ ही, यह भी जरूरी है कि पुलिस और प्रशासन इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए।
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