पवन सिंह, जमशेदपुर : दीपावली से पहले जमशेदपुर में सबसे बड़ा ‘बम’ फूटा है। झारखंड हाई कोर्ट की ओर से सुना गए एक फैसले के बाद शहर के लोगों को बड़ा तोहफा मिला है। कोर्ट के फैसले के अनुसार टाटा लीज एरिया में अब जमीन की रजिस्ट्री हो सकेगी। कोर्ट ने कहा है कि टाटा स्टील शहर के विकास और लोगों को रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के लिए सबलीज का निर्णय ले सकती है।

टाटा के लोगों को मिला सबसे बड़ा तोहफा
इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने झारखंड सरकार, टाटा स्टील,कोल्हान के प्रमंडलीय आयुक्त, पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त तथा जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति को प्रतिवादी बनाया था।आशियाना हाउस लिमिटेड और पारिख इन प्राइवेट लिमिटेड की याचिका सुनवाई करते हुए जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने यह आदेश जारी किया है। कोर्ट की ओर से 59 सबलीज के मामले में सुनवाई करते हुए झारखंड हाइकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। इस मामले में दो अलग-अलग याचिकाओं एक साथ जोड़कर संबंधित आदेश दिया गया है।
सनी के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि मामला विचाराधीन है। सरकार की तरफ से कोर्ट में पेश अधिवक्ता ने इन मामले में कई बार समय की मांग की। कोर्ट ने सरकार का पक्ष सुनने के लिए अगस्त 2023 में अपना फैसला रिजर्व रख लिया था। इसके बाद भी राज्य सरकार की तरफ से इस मामले में कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने पूरे मामले में अपना स्पष्ट आदेश जारी कर दिया है।
उपायुक्त के आदेश पर कोर्ट ने यह दिया निर्णय
कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार सहित सभी प्रतिवादियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। इस मामले पर न्यायालय ने अपने फैसले में 12 अलग-अलग बिन्दुओं पर विश्लेषण करते हुए उपायुक्त की ओर से 59 सबलीज के मामले में उपायुक्त के वर्ष 2012 में जारी किये गये आदेश का रद्द कर दिया है। इसके साथ ही इस पूरे मामले में राज्य सरकार की भूमिका को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया है।
कोर्ट ने कहा है कि इस मामले को दोबारा कैबिनेट के समक्ष पेश करने की कोई जरूरत नहीं है। कोर्ट ने अपने आदेश में लीज जारी करने के मामले में एप्रोप्रिएट कमेटी को समक्ष प्राधिकार माना है। टाटा स्टील को स्पष्ट आदेश दिया है कि वह 59 सबलीज की रजिस्ट्री करायें। सबलीज से होने वाले राजस्व से राज्य सरकार को होने वाले नुकसान की दलील को भी कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से बताया गया था कि यह मामले वर्ष 2015 से राज्य सरकार के स्तर पर विचाराधीन है।
READ ALSO : राजस्थान : टिकट से वंचित कई नेताओं के समर्थकों का भाजपा कार्यालय पर विरोध-प्रदर्शन जारी

