
Jamshedpur : टाटा स्टील में लंबे समय से लंबित ग्रेड रिवीजन (वेतन समझौते) को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। विशेष रूप से न्यू सीरीज (एनएस) ग्रेड के कर्मचारियों और उनके प्रतिनिधियों में समझौते को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। उनका आरोप है कि प्रस्तावित वेतन समझौते में एनएस ग्रेड कर्मचारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है
नाराज कमेटी मेंबरों ने टाटा वर्कर्स यूनियन के 11 में से 9 पदाधिकारियों से सवाल किया है कि एनएस ग्रेड कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में सुधार के लिए अब तक क्या ठोस प्रयास किए गए हैं। उनका कहना है कि प्लांट में लगभग 70 प्रतिशत कर्मचारी एनएस ग्रेड के हैं, लेकिन यूनियन में उनका प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है, जिससे उनकी मांगों को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है।
कमेटी मेंबरों के अनुसार टाटा स्टील में करीब 10 हजार कर्मचारी कार्यरत हैं। इनमें लगभग 3 हजार ओल्ड सीरीज (स्टील ग्रेड) कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व 130 कमेटी मेंबर करते हैं, जबकि करीब 7 हजार एनएस ग्रेड कर्मचारियों के लिए केवल 84 कमेटी मेंबर हैं। इस वजह से बहुसंख्यक होने के बावजूद एनएस ग्रेड कर्मचारी यूनियन की निर्णय प्रक्रिया में खुद को कमजोर स्थिति में महसूस कर रहे हैं
वेतन समझौते को लेकर मुख्य विवाद मिनिमम गारंटीड बेनिफिट (एमजीबी) और महंगाई भत्ता (डीए) को लेकर है। कमेटी मेंबरों का कहना है कि एमजीबी को लगभग 9,400 रुपये पर सीमित करने की तैयारी हो रही है। इससे 14 वर्ष के अनुभवी कर्मचारी और अपेक्षाकृत कम सेवा अवधि वाले कर्मचारियों को समान लाभ मिलेगा, जो न्यायसंगत नहीं है। साथ ही पिछले 15 वर्षों से डीए का प्रति प्वाइंट मूल्य तीन रुपये पर स्थिर है, जिसे बढ़ाकर छह रुपये करने की मांग की जा रही है।
सोमवार को यूनियन अध्यक्ष संजीव चौधरी के साथ हुई बैठक में भी कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलने के बाद कर्मचारियों की चिंता और बढ़ गई। इसके बाद एनएस ग्रेड के करीब 25 कमेटी मेंबर यूनियन के महामंत्री सतीश सिंह के बिष्टुपुर स्थित आवास पहुंचे और अपनी नाराजगी तथा मांगों से उन्हें अवगत कराया। बताया जाता है कि महामंत्री ने कहा कि यदि अध्यक्ष एनएस ग्रेड कर्मचारियों के हित में कोई सख्त कदम उठाते हैं तो वह उनके साथ खड़े रहेंगे।
इस बीच कुछ कमेटी मेंबरों द्वारा सामूहिक इस्तीफे के समर्थन में हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया गया। इस पर यूनियन अध्यक्ष ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि ऐसे कदम से यदि किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई होती है तो स्थिति और जटिल हो सकती है।
मंगलवार को प्रबंधन भी इस मामले में सक्रिय दिखाई दिया। हस्ताक्षर अभियान में शामिल कुछ कमेटी मेंबरों को एचआरएम विभाग के चीफ ने अपने कार्यालय में बुलाकर बातचीत की। अधिकारियों ने उन्हें औद्योगिक शांति बनाए रखने की सलाह देते हुए चेतावनी दी कि ऐसा कोई कदम न उठाया जाए जिससे वेतन समझौते के बाद कंपनी का कार्य वातावरण प्रभावित हो। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि अनुशासनहीनता की स्थिति में विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
वेतन समझौते को लेकर कर्मचारियों, यूनियन और प्रबंधन के बीच बढ़ती खींचतान ने टाटा स्टील के औद्योगिक माहौल को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगामी दिनों में ग्रेड रिवीजन को लेकर क्या निर्णय सामने आता है और एनएस ग्रेड कर्मचारियों की मांगों पर कितना विचार किया जाता है।
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