RANCHI: करमटोली स्थित आदिवासी छात्रावास पुस्तकालय में गुरुवार को आदिवासी छात्र संघ केंद्रीय समिति की ओर से संवाददाता सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें भोजपुरी, मगही और अंगिका भाषाओं को लेकर कड़ा विरोध जताया गया। संघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि ये भाषाएं झारखंड की मूल क्षेत्रीय या जनजातीय भाषाएं नहीं हैं, इसलिए इन्हें राज्य में लागू करना बंद किया जाए।
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि झारखंड सरकार इन भाषाओं को मान्यता देती है, तो आदिवासी छात्र संघ राज्यव्यापी झारखंड बंद का आह्वान करेगा। संगठन ने कहा कि इस आंदोलन में राज्य के सभी वर्गों सामान्य, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग समेत अन्य समुदायों से सहयोग की अपील की जाएगी।
संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका विरोध पुलिस प्रशासन से नहीं, बल्कि सरकार की कथित गलत नीतियों से है। आंदोलन के दौरान शांतिपूर्ण तरीके से सांकेतिक गिरफ्तारी दी जाएगी और किसी भी सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। संघ का कहना है कि झारखंड की नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं, जैसे जेपीएससी और जेटेट में इन भाषाओं के शामिल होने से स्थानीय जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं पर अतिक्रमण होगा। प्रेस वार्ता में सुशील कुमार मिंज, जतरु उरांव, प्रो. सतीश भगत, सुरेश टोप्पो समेत कई छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

