जमशेदपुर : विश्व पशु चिकित्सा दिवस, जिसे भारत में महर्षि शालिहोत्रा दिवस के रूप में प्रत्येक वर्ष अप्रैल के अंतिम शनिवार को मनाया जाता है, इस वर्ष अत्यंत प्रेरणादायक एवं नवाचारपूर्ण तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर बिष्टुपुर स्थित कला मंदिर के कॉन्फ्रेंस हॉल में शनिवार को एकदिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया, जिसमें जमशेदपुर क्षेत्र की 25 पशु सखी दीदियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को सशक्त बनाना तथा पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक पशु चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर डॉ. राजेश कुमार सिंह (प्रधान संपादक, पशुधन प्रहरी) द्वारा पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से पशु सखी दीदियों को जड़ी-बूटी आधारित उपचार एवं परंपरागत पशु चिकित्सा पद्धतियों द्वारा पशुओं के उपचार के विषय में विशेष रूप से विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। यह प्रशिक्षण ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त एवं सुलभ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इसके साथ ही, जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. समरजीत मंडल द्वारा पशु सखी दीदियों को पशुपालन से संबंधित सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के विषय में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि किस प्रकार महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) पशुपालन गतिविधियों से जुड़कर सतत आय अर्जित कर सकते हैं तथा अपने क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कार्यक्रम में कला मंदिर के एनआरएलएम हेड विश्वरूप चटर्जी ने पशु सखी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि किस प्रकार ये जमीनी स्तर पर कार्य करते हुए संस्थाओं की योजनाओं को सफलतापूर्वक ग्रामीणों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि पशु सखी दीदियां न केवल पशुपालकों की सहायक हैं, बल्कि वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की सशक्त आधारशिला भी बन रही हैं।
जमशेदपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में पशुपालन का विशेष महत्व है, विशेषकर जनजातीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जहां बकरी पालन, कुक्कुट पालन तथा सूकर पालन आजीविका के प्रमुख साधन हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद यह क्षेत्र पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से अग्रसर है। ऐसे में पशु सखी दीदियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, जो पशुपालकों तक वैज्ञानिक जानकारी और प्राथमिक उपचार सेवाएं पहुंचाकर इस क्षेत्र को सशक्त बना रही हैं।
इस प्रकार का सार्थक एवं दूरदर्शी आयोजन न केवल पशुपालन क्षेत्र को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। संस्था की यह पहल निस्संदेह सराहनीय है और अन्य संगठनों के लिए प्रेरणास्रोत है।
विश्व पशु चिकित्सा दिवस का यह आयोजन हमें महर्षि शालिहोत्रा की महान योगदान की याद दिलाता है, जिन्होंने पशु चिकित्सा विज्ञान की नींव रखी। आज के परिप्रेक्ष्य में, जब भारत “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य की ओर अग्रसर है, पशु सखी दीदियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। ये महिलाएं न केवल पशु स्वास्थ्य एवं प्रबंधन को सुदृढ़ कर रही हैं, बल्कि ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाते हुए राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दे रही हैं।
इस प्रकार, जमशेदपुर में आयोजित यह कार्यक्रम पशु चिकित्सा, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास के त्रिवेणी संगम का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है।
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