रांची : झारखंड सरकार ने सरकारी योजनाओं और निर्माण कार्यों से जुड़े ठेकेदारों और अभिकर्ताओं की वर्षों से फंसी सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य वापसी योग्य कटौतियों की राशि लौटाने की प्रक्रिया तय कर दी है। वित्त विभाग ने इसके लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार किया है। वित्त विभाग ने संबंधित विभागों के प्रधान सचिवों, सचिवों, उपायुक्तों (डीसी), उप विकास आयुक्तों (डीडीसी) और अन्य संबंधित अधिकारियों को इसके अनुसार आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है।
वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पहले कई योजनाओं में ठेकेदारों से सिक्योरिटी डिपॉजिट और टाइम एक्सटेंशन (टीई) से संबंधित राशि ऑफलाइन मोड में काटी गई थी और इसे पीएल खाते में रख दिया गया जो प्रक्रियात्मक रूप से गलत था। ऑफलाइन मोड में राशि लौटाने की कोई व्यवस्था नहीं थी, इसलिए उनकी राशि फंसी रही। बाद में ट्रेजरी और भुगतान व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन हो गई, लेकिन पुराने ऑफलाइन रिकॉर्ड ऑनलाइन सिस्टम में उपलब्ध नहीं होने के कारण संबंधित ठेकेदारों को उनकी जमा राशि वापस नहीं की जा सकी। इस वजह से बड़ी संख्या में मामले वर्षों से लंबित पड़े हुए थे। ऐसे लंबित मामलों के समाधान के लिए राज्य सरकार के निर्देश पर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर तैयार किया गया।
इसके तहत संबंधित कार्यालय का बिलिंग इंचार्ज सबसे पहले बिल मैनेजमेंट सिस्टम में ठेकेदार या अभिकर्ता की प्रोफाइल तैयार करेगा। इसमें पेयी आईडी, बिल हेड, योजना, यूनिट और सिक्योरिटी डिपॉजिट से जुड़ी पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में ऑफलाइन कटौती का ब्योरा मैनुअली दर्ज किया जाएगा।
इसके बाद डीडीओ (ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर) सभी विवरणों का सत्यापन करेंगे और आवश्यक दस्तावेजों के साथ अंडरटेकिंग अपलोड करेंगे। मामला ट्रेजरी पहुंचने पर ट्रेजरी पदाधिकारी दावे और दस्तावेजों की जांच करेंगे। सब कुछ सही पाए जाने पर आधार ओटीपी के जरिए अंतिम स्वीकृति दी जाएगी।
स्वीकृति मिलने के बाद डीडीओ बीटी कंट्रोल नंबर जनरेट करेंगे। इसके आधार पर ट्रेजरी संबंधित ट्रेजरी वाउचर (टीवी) से राशि निकालकर डीडीओ के खाते में उपलब्ध कराएगी। इसके बाद डीडीओ मौजूदा प्रक्रिया के अनुसार रिफंड बिल तैयार कर संबंधित ठेकेदार या अभिकर्ता को भुगतान कर सकेंगे।
वित्त विभाग का मानना है कि नई व्यवस्था लागू होने से ऑफलाइन कटौती के कारण वर्षों से फंसी सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य वापसी योग्य राशि लौटाने में तेजी आएगी तथा सरकारी योजनाओं से जुड़े ठेकेदारों और एजेंसियों को बड़ी राहत मिलेगी।

