
जम्मू-कश्मीर : जम्मू-कश्मीर में छह साल बाद स्थायी सरकार का गठन हुआ है और उमर अब्दुल्लाह ने मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। सरकार गठन के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही उमर अब्दुल्लाह ने जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के प्रस्ताव को पास किया। इस सिलसिले में उमर अब्दुल्लाह जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग करेंगे।
कैबिनेट बैठक में राज्य का दर्जा बहाल करने पर जोर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने सिविल सचिवालय में अपनी पहली कैबिनेट बैठक की, जिसमें उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी और मंत्री सकीना इत्तु, जावेद अहमद राणा, जावेद अहमद डार और सतीश शर्मा भी शामिल रहे। हालाँकि, इस बैठक के परिणाम की कोई आधिकारिक घोषणा अभी तक नहीं की गई है। उमर अब्दुल्लाह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि उनकी प्राथमिकता जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस दिलाना है।
उमर अब्दुल्लाह का दिल्ली दौरा और राजनीतिक उद्देश्य
उमर अब्दुल्लाह ने पहले भी कहा था कि वह चाहते हैं कि पहली कैबिनेट बैठक में राज्य का दर्जा बहाल करने का प्रस्ताव पास किया जाए और फिर इस प्रस्ताव को लेकर वह दिल्ली जाएंगे। वहां वह देश के शीर्ष नेताओं से मिलकर, इस मुद्दे को लेकर जोर देंगे। उनका मानना है कि जम्मू-कश्मीर की प्रगति और लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य का दर्जा बहाल किया जाना चाहिए।
PDP और अन्य दलों की प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के नेता वहीद पारा ने कहा कि उमर अब्दुल्लाह का प्रस्ताव केवल 5 अगस्त 2019 के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने की पुष्टि है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 को बहाल करने की मांग को कम करके केवल राज्य का दर्जा मांगना लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता। खासकर जब अनुच्छेद 370 को बहाल करने का वादा पार्टी के घोषणापत्र में किया गया था। हीं, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रमुख सज्जाद लोन ने अपने पोस्ट में कहा कि जम्मू-कश्मीर की कैबिनेट सही तरीके से केंद्र शासित प्रदेश के लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करती। उन्होंने कहा कि राज्य के दर्जे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को सुलझाने का काम विधानसभा के माध्यम से होना चाहिए। यह देखना दिलचस्प होगा कि जब यह प्रस्ताव विधानसभा में पेश होगा, तो भाजपा और अन्य दल इस पर क्या रुख अपनाते हैं।
BJP का रुख और विपक्ष की प्रतिक्रिया
भाजपा ने उमर अब्दुल्लाह के इस कदम को “राजनीतिक स्टंट” करार दिया है। भाजपा के प्रवक्ता सुनील सेठी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि उचित समय पर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कर दिया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग पर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती जा रही है। उमर अब्दुल्लाह का दिल्ली दौरा और प्रधानमंत्री से मुलाकात इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर उमर अब्दुल्लाह पूरी तरह प्रतिबद्ध नजर आ रहे हैं।

