
रांची : आदिवासी छात्र संघ के एक दल ने शनिवार को राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात की। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष सुशील उरांव की अगुवाई में छह सदस्यों ने राज्यपाल को एक मांग पत्र (ज्ञापन) सौंपा। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने मुख्य रूप से चुनाव के लिए सीटों के बदलाव (परिसीमन), आदिवासियों के राजनीतिक अधिकारों, पांचवीं अनुसूची के तहत मिलने वाली सुरक्षा और अलग ‘सरना धर्म कोड’ लागू करने की मांग की।
सीटों में कटौती मंजूर नहीं
संघ के अध्यक्ष सुशील उरांव ने कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण आदिवासियों के एक लंबे संघर्ष और त्याग के बाद हुआ है। इसलिए, सिर्फ आबादी में बदलाव का हवाला देकर आदिवासियों की राजनीतिक सीटों को कम नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने डर जताया कि अगर साल 2027 में होने वाले परिसीमन में नई जनगणना को आधार बनाया गया, तो राज्य में आदिवासियों के लिए आरक्षित कई विधानसभा सीटें और एक लोकसभा सीट कम हो सकती हैं। संघ की मांग है कि साल 1971 की जनगणना के आधार पर जो सीटें आदिवासियों के लिए तय की गई थीं, उन्हें वैसा ही रखा जाए ताकि उनके अधिकारों की रक्षा हो सके।
सरना धर्म कोड की मांग तेज
वहीं, संघ के केंद्रीय कोषाध्यक्ष डॉ. जलेश्वर भगत ने कहा कि अलग ‘सरना धर्म कोड’ आदिवासियों के अस्तित्व से जुड़ा है और यह मांग बहुत पुरानी है। इसे अगली जनगणना से पहले हर हाल में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि आदिवासियों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए उनका संगठन अलग-अलग राज्यों में जागरूकता अभियान चलाएगा।
इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल में सुशील उरांव और डॉ. जलेश्वर भगत के अलावा मनोज उरांव, विद्यासागर, संजय और रवि समेत अन्य सदस्य मौजूद थे।

