
कोलकाता : कोलकाता की दुर्गा पूजा खास होती है। नई सोच, रचनात्मकता, भव्यता के साथ ही बुद्धिजीविता यहां के पंडालों की विशेषता रही है। ढाक की गड़गड़ाहट के बीच देवी की स्तुति करते लोग और अपने संदेशों के जरिए समाज में घटित हो रही घटनाओं को प्रतिबिंबित करते पंडालों को देखने दूर-दराज के शहरों, राज्यों से लोग यहां हर साल आते हैं।
कलाकारों की सोच के क्या कहने, लाजवाब!
हर साल की तरह इस बार भी कोलकाता में दुर्गा पूजा ने अपनी भव्यता और रचनात्मकता से सबका दिल जीत लिया है। पंडालों की सजावट इतनी मनमोहक है कि हर कोई इनकी ओर खिंचा चला आ रहा है। इस वर्ष, पंडालों में प्रस्तुत अनूठी थीमों ने एक नई कहानी बुन दी है। इनमें से एक पंडाल ने पुराने ट्रांजिस्टर रेडियो के रूप में सजावट की है, जो न केवल nostalgía की लहर दौड़ाता है बल्कि रचनात्मकता का भी अद्भुत उदाहरण पेश करता है। इसके साथ ही,एक अन्य पंडाल को पारंपरिक बंगाली चटाई ‘मदुर’ से सजाया गया है, जिसमें मां दुर्गा की मूर्ति भी इसी चटाई से निर्मित की गई है।
परंपरा और आधुनिकता का संगम
दुर्गा पूजा के पंडालों में पारंपरिक और आधुनिकता का अनूठा मेल देखने को मिल रहा है। एक पंडाल भगवान जगन्नाथ के मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है, जबकि अन्य में पुनर्नवीनीकरण सामग्री का उपयोग किया गया है, जो पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने का एक बेहतरीन तरीका है। यहां लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
थ्री डायमेंशनल यूनिवर्स का जादू
इस साल के दुर्गा पूजा उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण ‘थ्री डायमेंशनल यूनिवर्स’ थीम वाला पंडाल रहा है, जिसे देखने के लिए महापंचमी के दिन भारी संख्या में भक्त उमड़े। यह पंडाल न केवल भव्यता में अविश्वसनीय है, बल्कि यह समाज और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भी संदेश देता है।
हरियाली की ओर एक कदम, पर्यावरण की चिंता
विभिन्न पंडालों में पर्यावरण को लेकर चिंता जताई गई है। लोगों को जागरूकता भरे संदेश दिए जा रहे हैं तो अंदर देवी दुर्गा की प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान खींच रही हैं। कई पंडालों में पौधों का उपयोग कर उन्हें सजाया गया है, जिससे हरियाली को बढ़ावा दिया जा सके और पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाया जा सके।
असम का टाइटैनिक पंडाल
कोलकाता के अलावा, असम के नगांव जिले में ‘टाइटैनिक’ जहाज के आकार का एक पंडाल तैयार किया गया है,जो इस साल के महोत्सव का आकर्षण केंद्र बन रहा है। यह नवीनता और रचनात्मकता का एक बेहतरीन उदाहरण है,जो दुर्गा पूजा के पंडालों को अद्वितीय बनाता है। इन सभी अनोखी सजावटों और थीमों के साथ, कोलकाता का दुर्गा पूजा इस बार एक बार फिर साबित करता है कि यह त्योहार केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि संस्कृति, कला और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का भी आदान-प्रदान करता है।

