जमशेदपुर: झारखंड के कोल्हान क्षेत्र में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने इस बार के चुनाव में 2019 के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन करते हुए अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। हालांकि चंपई सोरेन के भाजपा में शामिल होने से पार्टी को एक सीट का नुकसान हुआ, लेकिन झामुमो ने 10 सीटों पर जीत दर्ज की। इनमें से 7 सीटों पर पार्टी प्रत्याशियों ने पिछले चुनाव की तुलना में बड़े अंतर से जीत हासिल की।
चाईबासा में दीपक बिरुवा ने बनाया रिकॉर्ड
चाईबासा से झामुमो विधायक दीपक बिरुवा ने इस बार सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज की। 2019 में उन्हें 26,159 वोटों के अंतर से जीत मिली थी, जबकि इस बार यह अंतर बढ़कर 64,835 हो गया। कोल्हान में यह जीत का सबसे बड़ा अंतर रहा। इस जीत से दीपक बिरूआ और झामुमो के हौसले बुलंद हैं।
मझगांव, जुगसलाई और अन्य सीटों पर बढ़ा अंतर
मझगांव में विधायक निरल पूर्ति ने इस बार 59,603 वोटों से जीत दर्ज की, जो 2019 के 47,193 वोटों के अंतर से अधिक है। जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र से मंगल कालिंदी ने इस बार 43,445 वोटों से जीत दर्ज की, जो 2019 के 21,934 वोटों के अंतर से लगभग दोगुना है। घाटशिला के विधायक रामदास सोरेन ने भी अपना प्रदर्शन बेहतर किया। 2019 में उन्होंने 6,724 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि इस बार उनका अंतर 22,446 वोट तक पहुंच गया। ईचागढ़ से सविता महतो ने 26,523 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जो पिछले चुनाव के 18,710 वोटों के अंतर से अधिक है।
मनोहरपुर में बेटे ने तोड़ा मां का पिछला रिकॉर्ड
मनोहरपुर में इस बार झामुमो ने जोबा मांझी की जगह उनके बेटे जगत मांझी को प्रत्याशी बनाया। जगत ने अपनी मां के 2019 में 16,619 वोटों की जीत के अंतर को बढ़ाकर इस बार 31,956 कर दिया। खरसावां से दशरथ गागराई ने 32,615 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि 2019 में यह अंतर 22,795 वोट था।
इन सीटों पर घटा जीत का अंतर
बहरागोड़ा, पोटका और चक्रधरपुर झामुमो के लिए चुनौतीपूर्ण रहीं।
बहरागोड़ा: समीर मोहंती ने इस बार 18,125 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जबकि 2019 में यह अंतर 60,565 था।
पोटका: संजीव सरदार ने 27,902 वोटों से जीत दर्ज की, जो 2019 के 43,110 वोटों से कम है।
चक्रधरपुर: सुखराम उरांव ने इस बार 9,310 वोटों से जीत दर्ज की, जो 2019 के 12,234 वोटों के अंतर से कम है।
पार्टी की स्थिति मजबूत, लेकिन चुनौतियां कायम
झामुमो ने कोल्हान में बेहतर प्रदर्शन कर 10 सीटों पर जीत दर्ज की है और 7 सीटों पर जीत का अंतर बढ़ाया है। यह क्षेत्र में पार्टी के जनाधार का संकेत है। हालांकि, कुछ सीटों पर घटते अंतर को ध्यान में रखते हुए पार्टी को अपनी रणनीति में सुधार की जरूरत है।

