
कोलकाता : पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर गंगासागर मेले की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार कुंभ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन गंगासागर मेले के लिए एक भी पैसा नहीं देती। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार की इस नीति को भेदभावपूर्ण करार दिया और गंगासागर के विकास के लिए तत्काल मदद की अपील की।
गंगासागर के विकास में केंद्र की उपेक्षा
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि केंद्र सरकार गंगासागर जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने बताया कि कुंभ मेला एक विशाल आयोजन है, जिसके लिए केंद्र की तरफ से हर साल करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वही गंगासागर मेले के लिए केंद्र सरकार ने कभी भी कोई विशेष सहायता प्रदान नहीं की। ममता ने इस असमानता पर गहरी चिंता जताई और कहा कि गंगासागर जैसे धार्मिक स्थल को भी उतनी ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जितनी अन्य धार्मिक आयोजनों को मिलती है।
मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के इस रवैये को न केवल गंगासागर, बल्कि पश्चिम बंगाल की अन्य परियोजनाओं के लिए भी उपेक्षापूर्ण बताया। इसके साथ ही, ममता ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने मुरीगंगा नदी पर पुल बनाने का वादा किया था, लेकिन यह वादा अब तक अधूरा है। उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार इस पुल का निर्माण अपने खर्च पर करेगी, ताकि स्थानीय लोगों को राहत मिल सके और उनका जीवन आसान हो सके।
मछुआरों के मामले में ममता की पहल
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांग्लादेश से रिहा किए गए मछुआरों के बारे में भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की पहल के कारण इन मछुआरों को कैद से छुटकारा मिला और वे घर वापस लौटे। मछुआरों ने बताया कि बांग्लादेश में उनके साथ बुरा बर्ताव किया गया और उन्हें पीटा गया, लेकिन राज्य सरकार ने उनकी मदद के लिए तत्परता दिखाई। ममता ने इन मछुआरों को ₹10,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार उनकी बाकी जरूरतों का भी ख्याल रखेगी।
इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि उनकी सरकार ने सत्ता में आने के बाद हर मछुआरे को एक कार्ड प्रदान किया था। इस कार्ड की मदद से प्रशासन को यह जानकारी रहती है कि मछुआरे कहां गए हैं, ताकि यदि वे लापता हो जाएं, तो उन्हें ढूंढने में आसानी हो। इस कार्ड व्यवस्था के कारण ही पुलिस और प्रशासन को बांग्लादेश में कैद मछुआरों की स्थिति का पता चला। हालांकि, एक मछुआरे की मौत हो गई, जिसके परिवार को ₹2 लाख की सहायता प्रदान की गई।
गंगासागर के विकास के लिए महंत से अपील
गंगासागर मेले के संदर्भ में ममता बनर्जी ने वहां के महंत से भी एक महत्वपूर्ण अपील की। उन्होंने कहा कि गंगासागर में होने वाली दान की राशि का एक हिस्सा यहां के विकास और कटाव को रोकने के लिए खर्च किया जाना चाहिए। ममता ने सुझाव दिया कि अगर गंगासागर में दान से कुछ पैसा भी खर्च किया जाता है, तो इससे इस क्षेत्र के विकास में मदद मिल सकती है और यहां की स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है। उनका यह भी कहना था कि गंगासागर के विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर काम करना चाहिए।
गंगासागर और कुंभ की तुलना
मुख्यमंत्री ने गंगासागर और कुंभ मेले की तुलना करते हुए कहा कि कुंभ मेला पर केंद्र सरकार हर साल बड़ी रकम खर्च करती है, लेकिन गंगासागर को नजरअंदाज किया जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार से गंगासागर के विकास के लिए उचित कदम उठाने की मांग की और कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार गंगासागर को संरक्षित करने और उसके विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। ममता ने इस भेदभावपूर्ण नीति को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया और यह अपील की कि गंगासागर की अहमियत को समझते हुए इस पर भी ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस बयान से यह स्पष्ट हो गया कि पश्चिम बंगाल सरकार गंगासागर के विकास के लिए कोई भी कदम को उठाने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए केंद्र सरकार का सहयोग आवश्यक है।
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