पटना: बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति के बाद से चुनावी माहौल बनना शुरू हो गया है और इस बीच 18 जनवरी को कांग्रेस नेता राहुल गांधी बिहार दौरे पर आ रहे हैं। राहुल गांधी का यह दौरा खास है, क्योंकि वह पटना में ‘संविधान बचाओ’ सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। लेकिन इस कार्यक्रम को लेकर एक दिलचस्प बात यह है कि इस मंच पर महागठबंधन का कोई बड़ा नेता उपस्थित नहीं होगा, और खासकर, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव मंच पर नजर नहीं आएंगे। इस बात ने महागठबंधन में चल रही अंदरूनी राजनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संविधान बचाओ कार्यक्रम से होगी गोलबंदी की कोशिश
राहुल गांधी अपने इस दौरे के दौरान बिहार में नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों को निशाने पर लेने का प्रयास करेंगे। खासकर जातिगत जनगणना, आरक्षण की सीमा बढ़ाने और संविधान के मुद्दे पर वह बिहार की जनता को कांग्रेस के पक्ष में गोलबंद करने की कोशिश करेंगे। ये वही मुद्दे हैं, जिनकी लड़ाई पहले लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव ने शुरू की थी, और अब राहुल गांधी इसे आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
महागठबंधन के नेताओं को नहीं भेजा गया निमंत्रण
राहुल गांधी का कार्यक्रम पटना के श्री कृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित किया जा रहा है, लेकिन यह आयोजन कांग्रेस पार्टी की ओर से नहीं, बल्कि सिविल सोसाइटी की तरफ से किया जा रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद माधव ने स्पष्ट किया कि यह एक आउटरिच प्रोग्राम है और महागठबंधन के किसी भी नेता को इसमें निमंत्रण नहीं भेजा गया है।
आनंद माधव ने कहा, “राहुल गांधी जी संविधान बचाओ कार्यक्रम के तहत बिहार आ रहे हैं और यह कार्यक्रम सिविल सोसाइटी द्वारा आयोजित किया जा रहा है। महागठबंधन पूरी तरह से एकजुट है और राहुल गांधी महागठबंधन को मजबूत करने का काम कर रहे हैं।”
आरजेडी की सफाई: कोई विवाद नहीं
वहीं, आरजेडी के प्रवक्ता एजाज अहमद ने महागठबंधन में किसी भी तरह के विवाद से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि जिस दिन राहुल गांधी पटना आ रहे हैं, उस दिन तेजस्वी यादव पार्टी की बैठक में व्यस्त होंगे, इसलिए वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे। एजाज अहमद ने यह भी कहा कि राहुल गांधी के द्वारा उठाए जा रहे मुद्दे पहले ही लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव द्वारा आगे बढ़ाए गए हैं, इसलिए इस मामले में कोई विवाद नहीं है।
बीजेपी का हमला: कांग्रेस पर बाबा साहब का अपमान करने का आरोप
बीजेपी ने भी राहुल गांधी के दौरे को लेकर हमलावर रुख अपनाया है। बीजेपी के प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का अपमान किया है। उनका कहना था कि कांग्रेस ने दो बार बाबा साहब को चुनाव में हराया और उन्हें भारत रत्न भी गैर कांग्रेसी शासनकाल में मिला। पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में बाबा साहब को सम्मान मिला है, और उनकी मूर्ति तथा तस्वीर संसद में लगाई गई है।
विश्लेषकों का क्या कहना है?
राजनीतिक विश्लेषक डॉ. संजय कुमार का मानना है कि राहुल गांधी का बिहार दौरा अहम है, खासकर आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर। वे इसे कांग्रेस की जमीन को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। डॉ. कुमार का कहना था कि राहुल गांधी जिन मुद्दों पर बात करेंगे, वे पहले से ही लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के एजेंडे का हिस्सा हैं। इससे यह साफ होता है कि महागठबंधन के अंदर क्रेडिट की होड़ है और राहुल गांधी के साथ तेजस्वी यादव का मंच साझा न करना इस बात को दर्शाता है कि दोनों दलों के बीच अंदरूनी राजनीति चल रही है।
इस पूरे घटनाक्रम ने महागठबंधन के अंदर की राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दिया है। फिलहाल, यह देखना होगा कि राहुल गांधी के दौरे के बाद बिहार में गठबंधन की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या महागठबंधन के नेताओं के बीच का यह अंतर पटने का नाम लेता है या नहीं।
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