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Delhi Assembly : दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बनीं आतिशी, AAP की विधायक दल की बैठक में लिया गया फैसला

दिल्ली की कालकाजी सीट से विधायक आतिशी पार्टी के भीतर एक मजबूत और प्रभावशाली चेहरा मानी जाती हैं। केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद, आतिशी ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई थी।

by Rakesh Pandey
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नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा में अब विपक्ष की कमान आतिशी के हाथों में होगी। रविवार को आम आदमी पार्टी (AAP) की विधायक दल की बैठक में आतिशी को नेता प्रतिपक्ष चुने जाने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया। यह निर्णय पार्टी मुख्यालय पर आयोजित बैठक में हुआ, जहां सभी विधायकों ने एकमत होकर आतिशी के नाम पर मुहर लगाई। इसके साथ ही आतिशी अब दिल्ली विधानसभा में विपक्ष का नेतृत्व करेंगी।

आतिशी का राजनीतिक सफर और पार्टी में बढ़ता कद

आतिशी, जो दिल्ली की कालका जी सीट से विधायक हैं, पार्टी के भीतर एक मजबूत और प्रभावशाली चेहरा मानी जाती हैं। गत विधानसभा चुनाव में, जब पार्टी के बड़े नेता जैसे अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज को हार का सामना करना पड़ा, तब आतिशी ने अपनी सीट बचाए रखी थी। इससे उनकी राजनीतिक छवि को और भी मजबूती मिली है।

पिछले AAP सरकार में अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद, आतिशी ने कार्यवाहक मुख्यमंत्री के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई थी। इस दौरान उनके कामकाज को लेकर पार्टी में उनकी छवि और कद भी बढ़ा था और यही वजह रही कि विधायक दल की बैठक में उनका नाम विपक्ष के नेता के तौर पर प्रस्तावित किया गया।

महिला चेहरा के रूप में आतिशी का चयन

दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की ओर से महिला चेहरा लाने की दिशा में आम आदमी पार्टी ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पार्टी ने रेखा गुप्ता से मुकाबला करने के लिए महिला विपक्षी नेता के रूप में आतिशी को चुना है। इस निर्णय से यह स्पष्ट हो गया कि AAP महिलाओं के मुद्दों को लेकर गंभीर है और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

AAP की हार और संगठन में मंथन

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को अपेक्षाकृत हार का सामना करना पड़ा, इसके बाद पार्टी के भीतर समीक्षा का दौर शुरू हो चुका है। पार्टी के नेताओं ने चुनाव में मिली हार के कारणों की गहन समीक्षा की है। अब इसकी तकनीकी पहलुओं को समझने के लिए एक ऑडिट की योजना बनाई जा रही है। AAP लोकसभा, विधानसभा, जिला और वार्ड स्तर के फ्रंटल संगठनों के पदाधिकारियों की भूमिका का मूल्यांकन करेगी, ताकि भविष्य में ऐसे हालात से बचा जा सके।

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