
रांची: झारखंड सरकार में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हाफिजुल हसन एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने उनकी पीएचडी डिग्री को ‘फर्जी’ बताते हुए इसके पीछे पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क की आशंका जताई है। इसके बाद मंगलवार को हसन ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ से संबंधित पोस्ट हटा दी, जिससे विवाद और गहरा गया।
भाजपा का आरोप: ‘भारत वर्चुअल ओपन एजुकेशनल यूनिवर्सिटी’ को नहीं है डिग्री देने का अधिकार
भाजपा ने सोमवार को आरोप लगाया कि जिस संस्थान “भारत वर्चुअल ओपन एजुकेशनल यूनिवर्सिटी” ने हाफिजुल हसन को पीएचडी डिग्री प्रदान की है, वह भारत में डिग्री देने के लिए अधिकृत नहीं है।
राज्य भाजपा प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा ने कहा, “चूंकि मंत्री ने अपनी डिग्री संबंधित पोस्ट को हटा लिया है, इससे यह स्पष्ट होता है कि डिग्री फर्जी थी। यह उन नेताओं पर गंभीर सवाल उठाता है जो ‘डॉ.’ उपसर्ग लगाने के लिए फर्जी डिग्रियों का सहारा ले रहे हैं।”
उन्होंने यह भी मांग की कि ऐसे संस्थानों की गतिविधियों की गहन जांच की जानी चाहिए, जो शैक्षणिक प्रतिष्ठा से समझौता कर रहे हैं।
भाजपा का बड़ा आरोप: पाकिस्तान कनेक्शन और शरिया कानून का प्रचार
राज्य भाजपा प्रवक्ता अजय शाह ने सोमवार को आरोप लगाया कि यह संस्थान मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों द्वारा संचालित किया जा रहा है और इसकी कोई कानूनी हैसियत नहीं है। शाह के अनुसार, इस तथाकथित विश्वविद्यालय के चांसलर डॉ. उस्मान को ‘प्रोफेसर’ की उपाधि इस्लामाबाद, पाकिस्तान स्थित एक संस्था से प्राप्त हुई है। उन्होंने दावा किया कि इसी आधार पर यह संदेह प्रबल हुआ है कि मंत्री हाफिजुल हसन को मिली डिग्री का नेटवर्क पाकिस्तान से जुड़ा हुआ हो सकता है।
शाह ने कहा कि हसन ने देश की मान्य विश्वविद्यालयों से योग्यता प्राप्त करने में असफल रहने के बाद इस ‘कागजी विश्वविद्यालय’ से डिग्री हासिल की। उन्होंने इसे शरिया कानून को बढ़ावा देने वाला एक ऐसा संस्थान बताया, जिसकी भारतीय कानून के तहत कोई मान्यता नहीं है।
भाजपा ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है ताकि पाकिस्तान कनेक्शन की पूरी सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई कानून का उल्लंघन हुआ है तो सख्त कार्रवाई हो।
मंत्री हाफिजुल हसन: संथाल परगना से प्रभावशाली चेहरा
हाफिजुल हसन झारखंड की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार में एक प्रमुख चेहरा हैं और संथाल परगना क्षेत्र से आते हैं। वे अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ और सामाजिक-धार्मिक मुद्दों पर मुखर रुख के लिए जाने जाते हैं।
हालांकि इस मामले में मंत्री की ओर से कोई आधिकारिक बयान अब तक सामने नहीं आया है।

