RANCHI(JHARKHAND): झारखंड में जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को बाजार से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। राज्य में पहली बार बायर-सेलर मीट का आयोजन किया गया। जिसमें भारत के कई राज्यों के साथ-साथ केन्या से भी प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस आयोजन का उद्देश्य किसानों को जैविक उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराना और राज्य को जैविक कृषि की दिशा में अग्रणी बनाना है। कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अगले 10 वर्षों में जैविक उत्पादों के बाजार में 20% ग्रोथ की संभावना है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस ग्रोथ में झारखंड की हिस्सेदारी कितनी होगी और इसके लिए अभी से तैयारी जरूरी है।
राज्य के 70 परसेंट लोग कृषि पर निर्भर
मंत्री ने कहा कि झारखंड के 70% लोग कृषि पर निर्भर हैं और यहां जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में किसानों के लिए एक एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) बनाकर उन्हें सिक्किम जैसे जैविक खेती करने वाले राज्यों का दौरा कराना चाहिए ताकि वे जैविक कृषि को करीब से समझ सकें। यहां से बैठकर हम किसानों को जैविक खेती के बारे में नहीं बता सकते। उन्होंने फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन को प्रोसेसिंग यूनिट उपलब्ध कराने की योजना पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटे प्रोसेसिंग यूनिट्स किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बना सकते हैं, खासकर झारखंड जैसे राज्य में जहां भूमि संबंधी बाधाएं हैं।
विभाग के सचिव अबू बक्कर सिद्दीकी ने कहा कि जैविक खेती न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि किसानों के लिए अधिक लाभदायक भी है। उन्होंने बेहतर पैकेजिंग और बाजार उपलब्धता पर भी बल दिया। ओफाज के इस आयोजन के मुख्य आयोजक सीईओ विकास कुमार समेत कई विभागीय अधिकारी और विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे।

