रामगढ़ : झारखंड का रामगढ़ जिला हाथियों की वजह से सुर्खियों में आ गया है। हाथियों के हमले से चार लोगों की मौत से लोगों का ग़ुस्सा वन विभाग के खिलाफ फूट पड़ा है। बुधवार को स्थानीय लोगों ने चार नंबर चौक पर सड़क जाम कर दिया है। सुबह से ही ग्रामीण सड़क पर उतरकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वन विभाग और जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण ही हाथियों का आतंक बढ़ता जा रहा है। हाथियों को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।

रामगढ़ जिले के वेस्ट बोकारो में जंगल से निकले हाथियों का झुंड उत्पात मचा रहा है और वन विभाग सोया हुआ है। पूरे क्षेत्र के लोग डरे-सहमे हैं। मंगलवार को अलग-अलग स्थानों पर हाथियों ने दो महिलाओं समेत चार लोगों की कुचलकर मार दिया है। ग्रामीणों ने बताया कि सबसे पहले मंगलवार को शाम करीब चार बजे सारुबेड़ा की सीसीएल कोलियरी में तैनात गार्ड अमित रजवार (35) पर हाथियों ने हमला कर दिया। वह अपने कुछ साथियों के साथ जंगल में हाथियों के झुंड के पास मोबाइल से फोटो ले रहा था। इसी दौरान एक हाथी भड़क गया और उन्हें दौड़ाने लगा। इससे वहां भगदड़ मच गई। कुछ लोग किसी तरह जान बचाकर भाग निकले, लेकिन अमित को हाथी ने पकड़ लिया। हाथी ने उसे सूंड से पटक-पटक कर मार डाला।
दूसरी घटना मंगलवार को रात करीब साढ़े दस बजे हुई, जब गिद्दी निवासी अमूल महतो बाइक से घाटो कोलियरी क्षेत्र की ओर जा रहा था। इसी बीच हाथियों ने उसे सड़क पर घेर लिया और कुचलकर उसकी भी जान ले ली। इसके अलावा लखन करमाली की पत्नी सावित्री देवी और दशरथ मांझी की पत्नी पार्वती देवी को भी हाथियों ने अचानक हमला करके मौत के घाट उतार दिया।
वन विभाग भी इन चारों घटनाओं से इनकार नहीं कर रहा है। रेंजर बटेश्वर पासवान ने चारों मौतों की पुष्टि करते हुए कहा कि ये घटनाएं वेस्ट बोकारो ओपी क्षेत्र में हुई हैं। दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि हाथी-मानव संघर्ष रोकने में वन विभाग पूरी तरह विफल रहा है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात और भयावह हो सकते हैं।

