RANCHI: कैंसर का नाम सुनते ही लोगों के होश उड़ जाते है। वहीं जिसे ये बीमारी हो जाए तो उसके लिए एक-एक पल काटना मुश्किल हो जाता है। हालांकि अर्ली स्टेज में इस बीमारी का पता चल जाए तो कैंसर का इलाज संभव है। लेकिन आज स्थिति भयावह होती जा रही है। वहीं झारखंड के आंकड़े भी चौंकाने वाले है। ये हम नहीं बल्कि रिम्स के ओंकोलॉजिस्ट डॉ रोहित झा बता रहे है।
वर्ल्ड कैंसर डे पर उन्होंने बताया कि राज्य में 2025 में 35 हजार से अधिक कैंसर के नए मामले सामने आए है। वहीं रिम्स की बात करें तो 3412 मरीजों का एक साल में इलाज किया गया। इससे समझा जा सकता है कि कैसे ये बीमारी ‘शांत महामारी’ का रूप ले चुकी है। जिसे कंट्रोल करने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। नहीं तो आने वाले कुछ सालों में कैंसर मरीजों की संख्या दोगुनी हो जाएगी।
ब्रेस्ट कैंसर के 639 मरीज
डॉ रोहित ने बताया कि झारखंड में हर साल 35 से 40 हजार कैंसर के नए मामले सामने आते हैं। राज्य के सबसे बड़े सरकारी हॉस्पिटल रिम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में पिछले साल 3,412 मरीज इलाज के लिए पहुंचे। इनमें हेड एंड नेक कैंसर के 700, ब्रेस्ट कैंसर 639, सर्वाइकल कैंसर 509, स्टोमैक कैंसर 363 और ओवेरियन कैंसर के 334 मरीजों का इलाज किया गया। इसके अलावा ओरल कैंसर, जीआई कैंसर और ओवेरियन कैंसर की सबसे अधिक सर्जरी की गई।

युवाओं में बढ़ रहा खतरा
डॉ रोहित ने बताया कि सबसे अधिक चिंता का विषय युवाओं में कैंसर के मामलों में वृद्धि है। उन्होंने कहा कि भारत में अब 10-15 प्रतिशत नए कैंसर मामले किशोरों और युवाओं में देखे जा रहे हैं। युवाओं में ब्रेस्ट कैंसर, ओरल कैंसर, थायराइड, सर्वाइकल कैंसर और ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया) तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह लाइफस्टाइल में बदलाव है।
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड भोजन, फिजिकल एक्टिविटी का नहीं होना और मोटापा भी एक वजह है। इसके अलावा कम उम्र में गुटखा, खैनी और धूम्रपान की लत लोगों को बीमार कर रही है। हमारे आसपास वायु प्रदूषण और कीटनाशकों का प्रभाव भी युवाओं को बीमार बना रहा है। ऐसे में लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है। वहीं लक्षण दिखने पर तत्काल एक्सपर्ट से संपर्क करना ही एकमात्र उपाय है। उन्होंने कहा कि एचपीवी जैसे वायरस सर्वाइकल कैंसर का कारण बनते हैं।
समय पर जांच से रोकथाम संभव
उन्होंने कहा कि लगभग 50 प्रतिशत कैंसर को रोका जा सकता है। तंबाकू से दूरी, शराब का सीमित सेवन और 9-14 साल की लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगवाकर सर्वाइकल कैंसर का खतरे को लगभग खत्म किया जा सकता है। साथ ही कहा कि 30 साल के बाद महिलाओं को स्तन की नियमित जांच करनी चाहिए। वहीं सभी लोगों को मुंह के छालों या लाल-सफेद दागों की स्वयं जांच करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि शुरुआती पहचान कैंसर को इलाज योग्य बीमारी में बदल सकती है। दर्द का इंतजार न करें, क्योंकि शुरुआती चरणों में कैंसर अक्सर दर्द रहित होता है।
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