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Ghatshila News : घाटीडुबा दुर्गा मंडप में हुआ अपूर पाठशाला का शुभारंभ, गांव की तीन महिलाएं देंगी बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा

Ghatshila News : बांग्ला भाषा एवं संस्कृति को बचाना है तो सभी को मिलकर करना होगा संघर्ष : तापस चटर्जी

by Rajesh Choubey
Ghatiduba Durga Mandap Apur Pathshala Free Education Initiative
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Ghatshila : झारखंड बंगाल सीमा पर स्थित घाटीडुबा गांव में घाटीडुबा ग्रामीण कल्याण परिषद एवं गौरी कुंज उन्नयन समिति के संयुक्त तत्वाधान में 61 वां अपूर पाठशाला का शुभारंभ दीप जलाकर किया गया। इस मौके पर गौरी कुंज उन्नयन समिति के अध्यक्ष तापस चटर्जी, कंचन कर, मुखिया श्याम चांद मानकी, संजीव पांडा, सुधीर मिश्रा,भुजंग टुडू, जगन्नाथ कर, मानिक चन्द्र कर, अमुल्य दास, सुशील मानकी, गौरांग गोप, मनोज कर, अजीत पांडा, साधु चरण पाल, शिल्पी सरकार, साधना पाल,सोमा सरकार, शिखा रक्षित के द्वारा बंगला वर्ण माला एवं वर्ण परिचय पुस्तक, कॉपी पेंसिल का वितरण किया गया।

झारखंड में चल रही 60 अपूर पाठशाला

इस मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष तापस चटर्जी ने कहा कि सभी जाति एवं समुदाय के लोगों को अपनी मातृभाषा को जानने एवं सीखने का अधिकार है। इसलिए बांग्ला मातृभाषा को बचाना है तो सभी को मिलकर सहयोग करना होगा। उन्होंने कहा कि बांग्ला भाषा एवं संस्कृति को बचाए रखने के लिए 12 सितंबर 2018 को अपुर पाठशाला का उद्घाटन गौरीकुंज उन्नयन समिति परिसर में किया गया था। आज पूरे झारखंड में 60 अपूर पाठशाला का संचालन सफलता पूर्वक हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूरे झारखंड में 42 प्रतिशत लोग बांग्ला बोलते हैं, फिर भी आज हमारी भाषा उपेक्षित है।

हर रविवार को होगी पढ़ाई

उन्होंने कहा कि बांग्ला भाषा के विकास को लेकर आज तक किसी भी राजनितिक दल के लोगों ने प्रयास नहीं किया, सिर्फ हमें वोटर के रूप में इस्तेमाल किया है। झारखंड में ही देखरेख के आभाव में कई भाषाएं विलुप्त हो गईं। इसलिए अगर अपनी मातृभाषा को बचाना है तो इसके लिए सबको मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि हर रविवार को अपूर पाठशाला में अपने बच्चों को बांग्ला भाषा सीखने के लिए अवश्य भेजें। ताकि यह भाषा सुरक्षित और संरक्षित रह सके।

यह महिलाएं देगी बांग्ला भाषा की शिक्षा

इस मौके पर बच्चों के बीच चॉकलेट एवं केक का भी वितरण किया गया। इस विद्यालय में घाटीडुबा गांव की महिला सोनाली दास, नमीता दास और मल्लिका दास बंगला सीखने वाले छात्र छात्राओं को नि:शुल्क शिक्षा देंगी। इस मौके पर 50 छात्र छात्राओं के आलावा सैंकड़ों की संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।

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