Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के मंझगांव प्रखंड की एक महिला ने आर्थिक तंगी को मात देकर आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी है। सोनापोसी पंचायत के कटामनी गांव की निवासी बिनेश्वरी देवी (पति चंद्रकांत बारिक) आज पशुपालन के जरिए न सिर्फ अपने परिवार की तकदीर बदल रही हैं, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं।
मजदूरी से पशुपालन तक का सफर
पहले बिनेश्वरी देवी का परिवार कृषि और दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर था। आय का स्थायी स्रोत नहीं होने से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल था। आर्थिक कठिनाइयों के बीच उन्होंने हार नहीं मानी।
योजना बनी जीवन का टर्निंग पॉइंट
मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत बिनेश्वरी देवी को दो दुधारू गाय प्रदान की गईं। साथ ही पशुपालन संबंधी जरूरी मार्गदर्शन भी मिला। यह उनके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।
हर माह 12-13 हजार की कमाई
वर्तमान में दोनों गायों से प्रतिदिन लगभग 10-11 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। बिनेश्वरी देवी 40 रुपये प्रति लीटर की दर से स्थानीय बाजार में दूध बेचती हैं। इससे उनकी औसत मासिक आय 12,000 से 13,000 रुपये हो गई है।
बच्चों का भविष्य हुआ सुरक्षित
आज बिनेश्वरी देवी एक आत्मनिर्भर महिला के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर रही हैं और बच्चों की शिक्षा व भविष्य को सुरक्षित बना रही हैं। उनकी सफलता से गांव की अन्य महिलाएं भी पशुपालन अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं। बिनेश्वरी देवी की कहानी साबित करती है कि सही योजना और अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनी।
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