Home » NCERT Controversy : सरकार न्यायपालिका का अपमान नहीं करेगी बर्दाश्त, दोषियों पर कार्रवाई तय : केंद्रीय शिक्षामंत्री

NCERT Controversy : सरकार न्यायपालिका का अपमान नहीं करेगी बर्दाश्त, दोषियों पर कार्रवाई तय : केंद्रीय शिक्षामंत्री

अदालत ने पुस्तक पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। सभी फिजिकल और डिजिटल प्रतियों को जब्त करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं

by Mujtaba Haider Rizvi
NCERT Controversy
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

जमशेदपुर : राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ से जुड़े अध्याय पर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। कदमा स्थित श्री जगन्नाथ आध्यात्मिक व सांस्कृतिक केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुंचे मंत्री ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार पूरे प्रकरण की जांच कर जवाबदेही तय करेगी।

धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जो कुछ भी हुआ है, उससे वे बेहद दुखी हैं और सरकार की मंशा कभी भी न्यायपालिका का अपमान करने की नहीं रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विवादित सामग्री की गहन जांच कराई जाएगी और पाठ्यपुस्तक के उस हिस्से को तैयार करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि जैसे ही यह मामला सरकार के संज्ञान में आया, संबंधित किताबों के वितरण पर तुरंत रोक लगा दी गई। उन्होंने कहा कि सरकार न्यायपालिका का हृदय से सम्मान करती है और इस मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत की ओर से जो भी निर्देश दिए जाएंगे, उनका पूरी तरह पालन किया जाएगा। सरकार इस मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

क्या था विवादित कंटेंट

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नई पुस्तक के एक सेक्शन ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ को लेकर विवाद गहरा गया है। इस अध्याय में उल्लेख किया गया था कि भ्रष्टाचार, मुकदमों का बढ़ता अंबार और जजों की कमी भारतीय न्यायिक प्रणाली के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं। विवाद बढ़ने के बाद एनसीईआरटी ने बुधवार को माफी मांगते हुए कहा कि विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर पुस्तक की सामग्री को दोबारा लिखा जाएगा। हालांकि, अदालत ने इस माफीनामे को पर्याप्त नहीं माना और इसे संस्थान की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला कदम बताया। मामले को लेकर अब शैक्षणिक और न्यायिक हलकों में बहस तेज हो गई है तथा आगे की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह सोची-समझी साजिश

सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की विवादित पुस्तक मामले की सुनवाई करते हुए कड़ी टिप्पणियां की हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पांचोली की पीठ ने कहा कि यह न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश प्रतीत होती है। पीठ ने टिप्पणी की कि उन्होंने गोली चला दी है और आज न्यायपालिका लहूलुहान है। इस मामले में सरकार ने कोर्ट में माफी मांगी है।

अदालत ने विवादित किताब पर देशभर में पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए इसकी सभी भौतिक और डिजिटल प्रतियां तत्काल जब्त करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले को आपराधिक अवमानना की श्रेणी में मानते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद के निदेशक और स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को समन्वय बनाकर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पुस्तक कहीं भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध न रहे। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं।

Read Also- Droupadi Murmu Jamshedpur visit : बारीडीह में अपने वाहन से उतर गईं राष्ट्रपति, पैदल चल कर स्वीकार किया लोगों का अभिवादन, बच्चों को बांटे चॉकलेट

Related Articles

Leave a Comment