चाईबासा : झारखंड के सारंडा से नक्सलियों को जड़ से समाप्त करने के लिए सुरक्षाबलों ने एक बार फिर सीधे आदेश दिया गया। इसी मामले को लेकर शुक्रवार को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल सीआरपीएफ के महानिदेशक ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह अचानक समीक्षा करने चाईबासा पहुंचे। शुक्रवार दोपहर विशेष विमान से वह चाईबासा पहुंच कर सीधे समाहरणालय पहुंचे। डीजी ने पुलिस के राज्य स्तरीय अधिकारियों और सीआरपीएफ के साथ एक विशेष बैठक की। हालांकि पूरे मामले को लेकर मीडिया को काफी दूर रखा गया है। लेकिन बताया जाता है कि बैठक में सारंडा और कोल्हान के जंगलों में सुरक्षाबलों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करते हुए सारंडा में अंतिम सांस ले रहे हैं।
बचे नक्सलियों को जड़ से खत्म करने का आदेश दिया गया है।डीजी ने विशेष रूप से सारंडा में हो रही दिक्कत को लेकर सुरक्षाबलों को आईईडी और माओवादियों के एंबुश से निपटने को लेकर विशेष रणनीति बनाकर काम करने का निर्देश दिया है। बैठक में 1 मार्च को सारंडा के मरांगपोंगा जंगल में सुरक्षाबलों के साथ एक करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ भीषण मुठभेड़ हुई थी। लेकिन मुठभेड़ के दौरानकोबरा 209 बटालियन के सहायक कमांडेंट अजय मलिक और जवान विक्रम यादव घायल हो गए थे, जिनका वर्तमान में दिल्ली एम्स में इलाज चल रहा है।
इसे लेकर जवानों को विशेष निर्देश दिया। साथ ही जवानों का हौसला बुलंद किया। डीजी ने अभियान में जुटे जवानों का मनोबल बढ़ाते हुए स्पष्ट किया कि सुरक्षाबलों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। मिशन ‘मिसिर बेसरा का गैंग अंतिम टारगेट सुरक्षाबलों का मुख्य उद्देश्य अब सारंडा में एक करोड़ का इनामी भाकपा माओवादी नक्सलियों का टॉप लीडर मिसिर बेसरा और उसका 50 सदस्यीय दस्ता है। इसी को लेकर विशेष चर्चा की गई। क्योंकि सारंडा में मिसिर बेसरा का गैंग अब सारंडा में बचा है।31 मार्च तक सारंडा नक्सलमुक्त जिला केंद्र सरकार ने आगामी 31 मार्च तक पश्चिमी सिंहभूम जिले को पूरी तरह से नक्सलमुक्त करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। समय-सीमा नजदीक आने के कारण अभियान को तेज करने और नक्सलियों का जड़ से खत्म करने करने का मन बना लिया गया है।

