चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम के चक्रधरपुर में नवजात शिशु के शव को गत्ते के डिब्बे में ले जाने का मामला अब तूल पकड़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने पूरे मामले की पश्चिमी सिंहभूम जिले के उपायुक्त को करने का आदेश दिया गया है। इसके बाद डीसी ने मामले की जांच चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपी है। इसके बाद अस्पताल के अधिकारी मामले की लीपापोती में जुट गए हैं। अस्पताल के डाक्टरों ने अपने बचाव में पूरी रिपोर्ट तैयार कर ली है। जिस महिला को बच्चा हुआ है उसे खूब गंभीर तौर से बीमार होने की बात बताई जा रही है। उसे कई गंभीर बीमारी से ग्रसित बताया जा रहा है ताकि यह साबित किया जा सके कि इसी बीमारी की वजह से उसका नवजात मर गया।
यही नहीं, कल यह बात सामने आई थी पीड़िता ने नवजात को जना और कुछ देर बाद ही उसकी मौत हो गई। अब यह तथ्य गढ़ने का प्रयास हो रहा है कि नवजात मृत पैदा हुआ था। इस पूरी घटना पर लोगों की लगातार निगाह बनी हुई है। लोगों का कहना है कि अगर मामले की निष्पक्ष जांच हुई तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
एसडीओ ने डाक्टरों से की पूछताछ
एसडीओ ने सोमवार को चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल जाकर मामले की जांच की है। उन्होंने इस मामले में अस्पताल के डाक्टरों से भी पूछताछ की है। एसडीओ ने पत्रकारों को बताया कि मामले की जांच की गई है। वह डीसी को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगी। इस मामले में सोमवार को चक्रधरपुर अनुमंडल पदाधिकारी श्रृति राजलक्ष्मी ने चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल पहुंचीं। यहां उन्होंने घंटों चिकित्सा पदाधिकारी और स्वास्थ्य कर्मियों से पूछताछ की। जांच के बाद एसडीओ ने बताया कि इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने का प्रयास किया गया।
छुट्टी के समय क्या सुविधा दी बताने से कतरा रहे डाक्टर
गौरतलब है कि रीता तिरिया नामक महिला को प्रसाव के लिए चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल लाया गया था। सूत्रों की मानें तो डाकटरों ने एसडीओ को बताया है कि रीता तिरिया अन्य बीमारियों से भी ग्रसित थी। इस दौरान उसने मृत बच्चे को जन्म दिया था। अस्पताल प्रबंधन द्वारा जानकारी दी गई कि मृत बच्चे को ले जाने के लिए किसी तरह का ममता वाहन आदि की मांग परिजनों ने नहीं की थी। सवाल इस बात का है कि अगर पीड़ित की तरफ से ऐसी मांग नहीं की गई थी तो डाक्टरों को क्या यह सुविधा परिजनों को नहीं देनी चाहिए थी। क्या डाक्टर मृतक के पिता से नहीं पूछ सकते थे कि वह शव कैसे अपने घर ले जाएगा।
डाक्टरों ने कहा कि परिजनों को जानकारी का अभाव रहा होगा। इसलिए वह शिशु का शव गत्ते में ले कर गए। डाक्टरों ने एसडीओ को बताया कि अगले दिन महिला की छुट्टी होने पर अस्पताल प्रबंधन ने सारी व्यवस्था करा दी थी। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने एसडीओ को यह नहीं बताया कि उन्होंने छुट्टी के समय क्या क्या सुविधा और व्यवस्था मरीज को दी थी। एसडीओ अब पीड़ित का भी पक्ष लेंगी।
एंबुलेंस नहीं मिली तो गत्ते में ले जाया गया था शव
बता दें कि कराईकेला थाना क्षेत्र के बंगरासाई निवासी रामकृष्ण हेम्ब्रम की पत्नी रीता तिरिया शनिवार को चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में एक बच्चे को जन्म दिया था। बताया जा रहा है कि कुछ देर के बाद ही बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद पिता रामकृष्ण हेम्ब्रम नवजात के शव को एक डिब्बे में रख कर अपने गांव ले गए थे। इसके बाद मामला प्रकाश में आया और परिजनों ने आरोप लगाया कि बच्चे का शव ले जाने के लिए अस्पताल द्वारा उन्हें एम्बुलेंस की व्यवस्था नहीं दी गई।
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