चाईबासा। पश्चिम सिंहभूम चाईबासा पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। पुलिस अधीक्षक अमित रेणु के निर्देश पर लगभग 12 वर्षों से अपने परिवार से बिछड़े एक बालक को उसके परिजनों से मिलाया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले का एक बालक भटकते-भटकते केरल राज्य में पहुंच गया था। वहां पाए जाने के बाद उसकी देख-रेख केरल की बाल कल्याण समिति (CWC) की ओर से की जा रही थी।
चाईबासा के पहाड़ में बताता था अपना घर
केरल में जब कभी उसका असली पता पूछने की कोशिश की गई तो वह यही बताता था कि उसका घर चाईबासा जिले में एक पहाड़ में है और अधिक जानकारी पूछे जाने पर वह बताता था कि जिस पहाड़ पर उसका घर है वह उतना बड़ा नहीं है। उस पहाड़ के नीचे एक स्कूल है और उसके पिता का नाम- बोलराम माता का नाम- मनी, भाई फंटूश और दो छोटी बहनों का नाम तुरकी और तेरकी है।
पुलिस अधीक्षक ने सभी थाने को भेजे थे विवरण
इस सूचना के आधार पर पुलिस अधीक्षक चाईबासा की ओर से बालक का फोटो एवं विवरण जिले के सभी थाना प्रभाऱी एवं संबंधित शाखाओं को भेजकर उसकी पहचान कराने का प्रयास किया गया। उनका यह प्रयास रंग लाया। मानवीय सूचना एवं सोशल मीडिया के माध्यम से बालक के परिजनों तक जानकारी पहुंची। इसके बाद परिजन सामने आए, जिसका सत्यापन कराया गया।
सोनुवा जिले के गरीब परिवार का है राजा
जांच के दौरान ज्ञात हुआ कि बालक का नाम राजा गोप उर्फ गोमा है। उसके पिता का नाम बोडराम उर्फ बुधराम गोप तथा माता का नाम मानी गोप, निवासी ग्राम हाड़ीमारा, थाना सोनुवा, जिला पश्चिम सिंहभूम है। परिवार अत्यंत गरीब है तथा वर्तमान में आजीविका के लिए पश्चिम बंगाल में मजदूरी करता है। परिजनों से संपर्क स्थापित होने के बाद उन्हें पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण परिजनों ने बालक को वापस लाने के लिए पुलिस प्रशासन से सहयोग का अनुरोध किया। इसके बाद बालक को सकुशल वापस लाने की कार्रवाई करते हुए चाईबासा जिले से एक टीम केरल भेजी गई। इस टीम ने CWC केरल से आठ मार्च 2026 बालक को प्राप्त किया। टीम के वापस लौटने के बाद मंगलवार को सोनुवा थाने में इस बच्चे को उसके परिवार के हवाले किया गया।
जिले में हो रही चर्चा, पुलिस की प्रशंसा
इस बच्चे के लापता होने और इतने समय के बाद वापस अपने परिवार से मिलने की कहानी इलाके के लोगों में चर्चा का विषय बनी हुई है। बच्चे को वापस लाने की कार्रवाई को मानवीय संवेदनशीलता एवं सक्रिय पुलिसिंग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया जा रहा है। पुलिस की कोशिशों से ही वर्षों से बिछड़े एक बच्चे को उसके परिवार से मिलाने में सफलता मिली है।
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