RANCHI: वर्ल्ड टीबी डे पर मंगलवार को रांची के नामकुम स्थित आईपीएच सभागार में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री ने बड़ा ऐलान कर दिया। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के साथ टीबी उन्मूलन की दिशा में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। डॉ इरफान अंसारी ने 76 नव-नियुक्त मेडिकल ऑफिसरों को नियुक्ति पत्र प्रदान किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि 2029 तक झारखंड को टीबी मुक्त राज्य बनाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल टीबी का इलाज करना नहीं, बल्कि इस बीमारी को जड़ से समाप्त करना है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हमारा विजन है कि 2029 तक झारखंड टीबी मुक्त राज्य बने और इसके लिए हर स्तर पर काम किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी घोषणा की कि खून की कमी से जूझ रहे मरीजों के लिए जल्द ही टोल फ्री नंबर के माध्यम से रक्त उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार हुआ है और अब लोगों का भरोसा सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा है।

टीबी जागरूकता रथ को दिखाई झंडी
मौके पर टीबी उन्मूलन में उत्कृष्ट कार्य करने वाले टीबी चैंपियंस, सहियाओं और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों को भी सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान राज्य के सभी जिलों के लिए टीबी जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। ये रथ गांव-गांव जाकर लोगों को टीबी के लक्षण, जांच और इलाज के बारे में जागरूक करेगा। साथ ही राज्य में 100 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा। जिसमें जांच, पहचान, उपचार और पोषण सहायता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
मेडिकल कालेज और सदर में सीटी-एमआरआई
स्वास्थ्य मंत्री ने हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना तेजी से की जा रही है। उन्होंने कहा कि ब्रांबे में मेडिकल यूनिवर्सिटी की स्थापना की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और कुलपति की नियुक्ति भी की जा चुकी है। अप्रैल तक सभी मेडिकल कॉलेजों और सदर अस्पतालों में सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे मरीजों को अत्याधुनिक जांच और इलाज की सुविधा मिल सके।
9.5 लाख लोगों की टीबी जांच
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि वर्ष 2025 में राज्य में लगभग 9.5 लाख लोगों की टीबी जांच की गई थी, जबकि 2026 में 12 लाख जांच का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि और आधुनिक मशीनों की उपलब्धता से इस लक्ष्य को हासिल करना संभव होगा। उन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और निष्पक्ष रही है, जिसमें किसी प्रकार की सिफारिश का कोई स्थान नहीं था। नव-नियुक्त डॉक्टरों को उनकी पसंद के अनुसार स्थान दिया गया है और अब उनका स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। एनएचएम के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने बताया कि 24 मार्च को राष्ट्रीय यक्ष्मा दिवस इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन 1882 में टीबी के जीवाणु की खोज हुई थी।
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