Dhanbad : धनबाद रेलवे स्टेशन पर नई ट्रेन के नियमित परिचालन के शुभारंभ का कार्यक्रम अब सियासी विवाद का केंद्र बन गया है। झरिया विधायक रागिनी सिंह और धनबाद के मेयर संजीव सिंह को पहले औपचारिक निमंत्रण भेजा गया, लेकिन कार्यक्रम से ठीक पहले अचानक आमंत्रण रद्द कर दिए जाने से राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है।कार्यक्रम से पहले तक दोनों जनप्रतिनिधियों के नाम पोस्टर और बैनर पर मौजूद थे, जिससे साफ था कि उन्हें शामिल करने की पूरी तैयारी थी। लेकिन कार्यक्रम शुरू होने से महज एक घंटे पहले लिया गया यह फैसला प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
आनन-फानन में पोस्टर हटाए जाने की घटना ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि रेलवे बोर्ड के दिशा-निर्देश पहले से तय थे, तो आमंत्रण भेजा ही क्यों गया? और यदि कोई नियम बाधा था, तो उसे पहले क्यों नहीं देखा गया? इससे यह भी आशंका जताई जा रही है कि कहीं न कहीं अंतिम समय में राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में यह निर्णय बदला गया।इस पूरे मामले पर मेयर संजीव सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए धनबाद रेल मंडल के डीआरएम अखिलेश मिश्र की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि एक संवैधानिक पद पर रहते हुए इस तरह का फैसला लेना समझ से परे है और यह जानना जरूरी है कि आखिर यह कदम किसके दबाव में उठाया गया।मेयर ने इशारों-इशारों में विधायक ढुल्लू महतो पर भी निशाना साधते हुए तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को अपना “बीपी चेक” कराने की जरूरत है। चाहे बाघमारा हो या धनबाद, अच्छे डॉक्टर उपलब्ध हैं, और जरूरत पड़े तो दिल्ली एम्स जाकर भी इलाज कराया जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उद्घाटन जैसे आयोजनों में श्रेय लेने की राजनीति नई नहीं है, लेकिन पहले आमंत्रण देकर बाद में रद्द करना लोकतांत्रिक मर्यादा पर सीधा आघात माना जा रहा है। जनप्रतिनिधियों का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि जनता की भावनाओं से जुड़ा विषय है।अब मांग उठ रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदारों की पहचान की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।

